झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास से चुनाव आयोग इस समय काफी नाराज है। इसकी वजह बने हैं वो 32,000 टैबलेट जिन्हें दास ने अध्यापकों को सरकारी योजना के तहत बांटा था। दरअसल, इस टैबलेट को जैसे ही ऑन किया जाता है वैसे ही इसमें मौजूद इनबिल्ट वीडियो मैसेज चल जाता है।
हालांकि सखी मंडल के सदस्यों को दिए गए 72,000 मोबाइल की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। आयोग ने बीते रविवार को झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद् को निर्देश दिए हैं कि वह तुरंत प्रभाव से उन टैबलेट का उपयोग न करें जिन्हें कि ई-विद्या वाहिनी योजना के तहत वितरित किया गया था।
सरकार ने 72,000 मोबाइल फोन का वितरण किया है ताकि इससे ग्रामीण महिलाओं में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दिया जा सके। इन फोन में भी मुख्यमंत्री का एक मैसेज है जो फोन के ऑन या ऑफ होने पर अपने आप चलने लगता है।
लोहारडागा जिले की सखी मंडल की सोनम दुलारी ने कहा, 'हमारी सखी मंडल को एक फोन मिला है जिसे हम लगातार महिलाओं को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इस फोन में मुख्यमंत्री का एक संदेश है जो स्विच ऑन होते ही अपने आप चलने लगता है।'
यह फीचर हर उस डिवाइस में मौजूद है जिसे राज्य सरकार ने पिछले कुछ सालों में वितरित किया है। यह सभी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने की वजह से चुनाव आयोग के स्कैनर पर हैं।
दास सरकार ने सभी सरकारी दफ्तरों में टैबलेट वितरित किए हैं। उन उपकरणों में ऐसे संदेशों की मौजूदगी की फिलहाल पुष्टि नहीं की जा सकी है। आयोग के निर्देश का संज्ञान लेते हुए जेईपीसी ने सभी अध्यापकों, जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों जिन्हें ई विद्या वाहिनी टैबलेट मिले हैं, उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वह तुरंत प्रभाव से इसका उपयोग बंद कर दें।