झारंखड विधानसभा में मंगलवार को विधायक फंड का मामला उठाया गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही पिछले एक वर्ष से फंड जारी नहीं होने पर नाराज थे। विधायकों ने इस संबंध में सरकार से जवाब मांगा, लेकिन विधायक मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए।
सदन की दूसरी पाली में झामुमो के विधायक लोबिन हेंब्रम ने विधायक फंड का मुद्दा उठाया। उन्होंने विधायक फंड पांच करोड़ करने और दस महिनों से फंड जारी नहीं होने की बात कही। तब उपमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले को ग्रामीण विकास विभाग का बताया।
बाद में मुख्यमंत्री ने सदन में आने पर कहा कि राज्य में करीब आठ हजार करोड़ से अधिक व्यय का मामला है। पहले सरकार नियमों में ढील देकर विधायक फंड की राशि जारी करती रही है। अब कितनी बार नियमों को शिथिल किया जाएगा। सरकार इसका स्थायी समाधान खोज रही है।
विधायकों ने मुख्यमंत्री के इस बयान का विरोध किया। यहां तक कि स्पीकर ने भी उनके बयान से सहमति नहीं जताई। इस पर कुछ विधायकों ने इस फंड को ही समाप्त करने की मांग कर दी। विधायकों ने सरकार पर अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।