दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और सुरक्षाबलों के बलप्रयोग का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा है। विपक्षी राजनीतिक दल इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। अब झारखंड में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन, विधानसभा घेराव करने सड़कों पर उतरे छात्रों और प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज का मामला सुर्खियों में है। इस मामले में भाजपा बनाम कांग्रेस वाली राजनीति भी शुरू हो चुकी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से तीखे सवाल किए हैं। आंदोलन कर रहे छात्र नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार उनकी आवाज को कुचलना चाहती है, लेकिन सरकार के मंसूबे कामयाब नहीं होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने भी झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्तियों में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराने की मांग का समर्थन किया है।
अब कोई भी बात सीधे मुख्यमंत्री से ही होगी
सरकार की दलील
रांची में जेपीएससी-जेएसएससी उम्मीदवारों के विरोध प्रदर्शन पर उपायुक्त (डीसी) मंजुनाथ भजंत्री ने कहा, विधानसभा घेराव के आह्वान से जुड़े अधिकांश छात्रों ने संयम का परिचय दिया। हालांकि, कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस और अधिकारियों को उकसाने का प्रयास किया; एक जवान पर पत्थर फेंका गया। एक अन्य जवान को भीड़ ने कुचल दिया, जिससे उसकी जान खतरे में पड़ गई। हल्का बल प्रयोग कर जवान को रेस्क्यू किया गया। पुलिस ने यथासंभव संयम बरतते हुए बल प्रयोग से बचने का प्रयास किया। विधानसभा सत्र और सांविधानिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चले, ये सुनिश्चित करने के लिए आठ जगहों पर बैरिकेडिंग की गई।
क्या आंदोलन में असामाजिक तत्व भी शामिल?
बकौल उपायुक्त भजंत्री, सोमवार शाम विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने आंदोलनकारियों से रास्ते खाली करने को कहा, सरकारी कर्मचारी और पदाधिकारियों को निकलने देने की अपील की गई। पुलिस और मजिस्ट्रेटों द्वारा बार-बार रास्ता खाली करने के अनुरोध के बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया; इसलिए, उन्हें हटाने और स्थिति को सामान्य करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया। उपायुक्त के मुताबिक पुलिस और जिला दंडाधिकारियों ने बार-बार रास्ता खाली करने का अनुरोध किया, लेकिन, प्रदर्शनकारियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। ऐसे में उन्हें हटाने और स्थिति को सामान्य करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया। कुछ असामाजिक तत्वों ने आंदोलन में शामिल होकर उपद्रव भड़काने की कोशिश की। पुलिस के साथ मौखिक दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की भी की घई। हालात बिगाड़ने में शामिल असामाजिक तत्वों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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रांची पुलिस ने क्या कहा?
विधानसभा घेराव और छात्र आंदोलन के बीच राजधानी रांची की मौजूदा स्थिति को लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन ने कहा, इस बात पर आम सहमति बनी थी कि विधानसभा परिसर का घेराव पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा... विधानसभा परिसर के पास ही विधायकों का आवासीय परिसर भी है, वहां परिवार के लोग भी रहते हैं। ऐसे में पुलिस ने काफी संयम बरता। हमने छात्रों को उनकी इच्छानुसार धीरे-धीरे आगे बढ़ने दिया। स्थिति के अनुरूप न्यूनतम बल प्रयोग किया गया। वर्तमान स्थिति शांतिपूर्ण है। पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण रहा।
क्या पुलिस ने मजबूरी में किया लाठीचार्ज, चोटिलों का इलाज कैसे?
लाठीचार्ज की नौबत आने और शाम में सूर्यास्त के बाद आंदोलनकारियों को दौड़ाकर पीटे जाने के संबंध में एसएसपी राकेश रंजन ने कहा, पुलिस ने न्यूनतम बल का प्रयोग किया; हमने प्रदर्शनकारियों को पूरे दिन अपनी इच्छानुसार कार्य करने की अनुमति दी। हमने उनसे बातचीत करने और उन्हें विनम्रतापूर्वक समझाने का हर संभव प्रयास किया। हालांकि, कुछ लोगों ने बात नहीं मानी और बार-बार हंगामा करने की कोशिश की।
छात्रों के आंदोलन के बीच 11 अगस्त को बंद का आह्वान, प्रशासन क्या करेगा?
विपक्षी राजनीतिक पार्टी की तरफ से आहूत रांची बंद को लेकर राजधानी के उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री ने कहा, जिला प्रशासन और पुलिस के समन्वय से शांतिपूर्ण ढंग से बंद का पालन करने की अपील है। अगर मंगलवार को कोई असामाजिक तत्व कानून व्यवस्था को बिगाड़ने, शांति भंग करने या हिंसा भड़काने का प्रयास करता है, तो पुलिस उचित कार्रवाई करेगी।
क्या रांची बंद के दौरान स्कूल खुले रहेंगे?