खासी जद्दोजहद के बाद आखिरकार कांग्रेस नेतृत्व ने झारखंड मुक्ति मोर्चे के साथ मिलकर झारखंड में सरकार बनाने का मन बना लिया है। शुरुआती बातचीत के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चे के नेता हेमंत सोरेन अपने सहयोगियों समेत दिल्ली आ गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस गठबंधन की अगर सरकार बनती है तो झामुमो, कांग्रेस और राजद मिलकर तय करेगी कि मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का पद किस पार्टी को दिया जाए।
सूत्रों का कहना है कि हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री होंगे। साथ में कांग्रेस का कोई वरिष्ठ विधायक और गठबंधन में शामिल होने वाली राजद के नेता उप मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इस बारे में झामुमो नेताओं की कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रक्षा मंत्री एके एंटनी के साथ निर्णायक बातचीत होगी।
यह जानकारी देने वाले सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के प्रभारी महासचिव बी.के.हरिप्रसाद और झारखंड के पूर्व प्रभारी महासचिव शकील अहमद ने रांची में झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन और उनके बेटे हेमंत सोरेन के साथ बातचीत करके गठबंधन सरकार की भूमिका तैयार की।
इसके बाद सभी नेता दिल्ली आ गए हैं। दिल्ली में उनकी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत जारी है।
बताया जाता है कि कांग्रेस सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने के बदले कुछ महत्वपूर्ण मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष पद अपने पास रखना चाहती है। साथ ही कांग्रेस लोकसभा चुनाव में गठबंधन बनाए रखते हुए ज्यादा सीटें भी चाहती है।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस किसी गैर आदिवासी को उपमुख्यमंत्री बनाकर राज्य में अपने गैर आदिवासी वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है।
इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह, वरिष्ठ विधायक मन्नान मलिक, सरफराज अहमद आदि के नाम लिए जा रहे हैं।
कांग्रेस और झामुमों के बीच पिछले करीब एक महीने से संपर्क सूत्रों के जरिए बातचीत शुरु हुई थी।
जबकि पहले राज्य विधानसभा भंग करके नवंबर में होने वाले पांच राज्यों के साथ विधानसभा चुनाव कराने का इरादा भी बना था, क्योंकि तब सोनिया गांधी और राहुल गांधी गठबंधन सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं थे।
लेकिन अब कांग्रेस नेतृत्व को लगता है कि अगर झारखंड में झामुमो के साथ सरकार बनी तो उसका फायदा लोकसभा चुनाव में झारखंड के साथ बिहार में भी मिल सकता है।