फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झारखंड चुनाव: हेमंत सोरेन ने पूछा- मोदी जी क्या भगवान हैं, जो कभी हार ही नहीं सकते

Sun, 22 Dec 2019 06:26 AM IST
योगेश साहू विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • झामुमो नेता ने कहा- हमने चुनाव में राज्य के मुद्दे उठाए
  • अनुच्छेद 370 और मंदिर मुद्दे के इर्दगिर्द घूमी भाजपा 
  • भाजपा के 70 पार के नारे का दिया जवाब: सोरेन
  • हेमंत बोले- हमारा नारा था इस बार रघुबर पार
विज्ञापन
Hemant Soren - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के पांचों चरण पूरे हो चुके हैं। एग्जिट पोल के नतीजे झामुमो कांग्रेस राजद गठबंधन की बढ़त बता रहे हैं। इस बीच चुनाव और उसके मुद्दों को लेकर झामुमो नेता हेमंत सोरेन से अमर उजाला के लिए विनोद अग्निहोत्री ने बातचीत की। इस बातचीत में सोरेन न सिर्फ जीत का दावा कर रहे हैं बल्कि वह यह भी कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई भगवान नहीं हैं जो कभी हार ही नहीं सकते। सोरेन कहते हैं कि जो सूरज निकलता है वो ढलता भी है।

विज्ञापन


सवाल: झारखंड में पांचों चरण के मतदान हो चुके हैं और एग्जिट पोल के नतीजे भी आ चुके हैं? आपको क्या लगता है?

जवाब: विगत पांच साल के कार्यकाल को देखकर लगता है और चुनाव और एग्जिट पोल के रुझान भी बता रहे हैं कि लोगों ने बदलाव के लिए वोट किया है। रांची और जमशेदपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में भी मतदान प्रतिशत गिरा है। जैसी उम्मीद थी वैसा नहीं हुआ। इसका मतलब लोगों में कहीं न कहीं मौजूदा भाजपा सरकार के प्रति निराशा है। मुझे लगता है कि बदलाव होगा।

सवाल: लेकिन भाजपा के चुनाव अभियान की पूरी कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाली और आखिर में मोदी सब पर भारी पड़ जाते हैं?

जवाब: मोदी जी क्या भगवान हैं, जो हार ही नहीं सकते। कितने दिन जुमलों की राजनीति चलेगी। अगर ऐसा होता तो महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा की यह दशा नहीं होती। चुनाव शुरू होते ही बदलाव के लक्षण दिखने लगते हैं। जो थोड़ी बहुत इनकी धुंधली तस्वीर थी इस बार पूरी तरह साफ हो चुकी है। लगता नहीं है कि भाजपा में अब कोई दूसरा बचा है। ये लोग अब सिर्फ मोदी जी के ही भरोसे अपनी नैया पार लगाने की कोशिश करते हैं। मोदी जी किस तरह से लोगों पर प्रभाव डाल सकते हैं। या तो ये बिलकुल मुद्दों से अलग चलते हैं या लोगों को दिग्भ्रमित करने वाली बातें करते हैं।लेकिन अब लोग मोदी जी को समझने में परिपक्व हो चुके हैं। मोदी जी का कितनी बार ये लोग उपयोग कर लेंगे। कितनी बार मोदी जी चमकेंगे। आज नहीं तो कल सूरज तो ढलता ही है।
विज्ञापन


सवाल: चुनाव में आपके प्रमुख मुद्दे क्या थे?

जवाब: हमारा सबसे बड़ा मुद्दा रघुबर दास ही हैं। हमें कभी नहीं लगा कि राज्य में कोई सरकार भी है। हमें हमेशा लगा कि यहां एक रबर स्टांप मुख्यमंत्री है जो दिल्ली में बैठे आलाकमान के एजेंट के रूप में काम करता है। नतीजा पूरा राज्य अस्त व्यस्त हो गया पांच साल में। भूख से लोग मर गए। किसानों ने आत्महत्याएं कीं, जिसका कभी यहां इतिहास नहीं था। नौजवान बेरोजगारी से तंग आ गए। डिग्री लेकर ट्रेन के सामने कूद रहे हैं। वो भी हमारे नहीं भाजपा नेताओं के बच्चे। इतनी भयावह स्थिति हो गई।

सवाल: रघुबर दास के अलावा और क्या मुद्दे थे?

जवाब: दूसरे जो आंतरिक मुद्दे हैं जैसे नक्सलवाद, महिलाओं की असुरक्षा। हालांकि यह तो देश की समस्या बन गई है। अब देश में कोई महिला सुरक्षित नहीं है ऐसा साफ दिखने लगा है। शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है। इस सवाल का जवाब शिक्षा जगत के लोगों से आप पूछिए तो पता चलेगा कि शिक्षा के मामले में इनका जो रवैया रहा है। उच्च शिक्षा में आनन-फानन में मेडिकल कालेज का उद्घाटन कराना, जहां अभी सिर्फ चालीस फीसदी ही काम हुआ है। प्राथमिक शिक्षा की हालत यह है कि गांवों में प्राइमरी स्कूल बंद करके शराब के ठेके खोल दिए गए हैं। स्कूल विलय के नाम पर 16 हजार स्कूल बंद कर दिए गए। सुधार का कोई मॉडल है नहीं कोई विकल्प है नहीं। पुराने बंद कर दिए और नए खुले नहीं। बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया, क्या पांच साल बाद वह बच्चा फिर स्कूल आएगा।

सवाल: भाजपा का पूरा चुनाव प्रचार राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित था? खुद नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और एनआरसी जैसे मुद्दे उठाए, उनका चुनावों पर क्या असर पड़ा?

जवाब: हम पूरे चुनाव में बिल्कुल स्पष्ट थे कि यह चुनाव राज्य का है। ये केंद्र का चुनाव नहीं है। केंद्र के चुनाव हो चुके हैं। उसकी जिम्मेदारी जनता लोगों को दे चुकी है। अब राज्य के लोगों की समस्याओं पर मतदान हुआ है। देश में हर राज्य की समस्या अलग-अलग है। गुजरात की समस्या झारखंड में नहीं है। झारखंड की गुजरात में नहीं है। जम्मू-कश्मीर की समस्या अलग है, पंजाब की अलग है। हमने अपने राज्य की समस्या को जनता के सामने रखा है। क्या राज्य की समस्या राम मंदिर से हल होगी। राज्य की समस्या राज्य के ही चुनाव में रखी जाती है। लोगों ने इसी मुद्दे पर वोट दिया है। भाजपा के पास कोई मुद्दा ही नहीं था। पूरे चुनाव में भाजपा ने बेरोजगार, आर्थिक स्थिति, गरीबी, किसानों की तबाही, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के मुद्दों पर बात ही नहीं की। सिर्फ राम मंदिर, अनुच्छेद 370, नागरिकता कानून, एनआरसी की बात की। भाजपा सिर्फ धर्म जाति की बात करती है। जो लोगों को भावनात्मक रूप परेशान करते हैं। लेकिन लोगों ने इसे खारिज कर दिया है।

सवाल: सीएबी और एनआरसी पर आपका क्या रुख है?

जवाब: एनआरसी कोई नई चीज नहीं है। नई बात ये है कि अब जाति धर्म के नाम पर फैसले हो रहे हैं जो देश के लिए खतरनाक है। कैब की बात देखिए पूरे देश में आग लगी है। ये आग धीरे धीरे और भड़केगी। ये रुकने वाली नहीं है। अब जिस तरह असम में असमियों की जगह बाहरियों को बसाने की कोशिश हो रही है ऐसे कई उदाहरण हैं। दलितों को दलितों से, आदिवासियों को आदिवासियों से, पिछड़ों को पिछड़ों से लड़वाया गया। हिंदू-मुस्लिम को लड़वाना तो भाजपा का कोर एजेंडा है। बांटो और राज करो की अंग्रेजों वाली नीति है। मुझे लगता है कि इन्हें जब समय मिला है मुद्दों के आधार पर देश चलाने का तो ये भावनात्मक मुद्दे आगे कर रहे हैं। अब आगे लोग इन्हें फिर मौका देंगे, इसमें मुझे संदेह है।

सवाल: चुनाव में आदिवासियों की जमीन से जुड़े सीएनटी और एसपीटी के मुद्दे का भी असर पड़ा है क्या?

जवाब: इस राज्य के मूल निवासी आदिवासी चाहे सीएनटी, एसपीटी हो या भूमि अधिग्रहण कानून हो या कोई और बड़े पैमाने पर प्रभावित होते रहे हैं और हो रहे हैं। इस पर सरकार का रवैया बेहद नकारात्मक रहा है। आदिवासी समाज की अपनी जीवनशैली, सभ्यता और संस्कृति है। ये समाज मेट्रो शहरों में नहीं बसते। इस समाज का अपना अलग वातावरण है। आज उस वातावरण को ये खत्म करने की कोशिश हो रही है, यानि आदिवासी समाज को खत्म करने का सोचा समझा षड्यंत्र है। इस राज्य में जो अपार खनिज संपदा है कुल मिलाकर उसी पर लोगों की नजर जाती है।

दुर्भाग्य हो या भाग्य हो उस खनिज संपदा के ऊपर यही आदिवासी समाज काबिज है। अब जब तक उस संपदा के ऊपर से इस समाज को हटाया नहीं जाता, वह संपदा निकाली कैसे जाएगी। इसलिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं। पहले अंग्रेजों ने रेल मार्ग बनाया और अब इन्होंने जल मार्ग भी बना लिया। अब दोनों रास्तों से लूटेंगे। इसका हमेशा से विरोध होता रहा है। यह झारखंड का इतिहास है। जमीन से जुड़े मुद्दों पर ही राजनीति होती रही है। सरकार बनने पर हम इस मुद्दे पर बड़े पैमाने पर चिंतन करेंगे। झारखंड राज्य बनने के बाद 70 फीसदी आदिवासी आबादी आज 36 फीसदी कैसे रह गई। सीएनटी एसपीटी एक्ट के बावजूद इनकी 70 फीसदी जमीनें कहां चली गईं। हम उनको भी खोजेंगे और इन 70 फीसदी लोगों को भी खोजेंगे।
विज्ञापन

सवाल: एग्जिट पोल अलग-अलग आंकड़े दे रहे हैं। हालांकि ज्यादातर आपके गठबंधन को बढ़त भी दे रहे हैं। लेकिन आपका अपना क्या अनुमान है सीटों का?

जवाब: यह आपने बहुत बड़ा सवाल मुझसे पूछा है। लेकिन मैं भाजपा की तरह साठ पार या सत्तर पार, नब्बे पार की बात नहीं करता। उनके सत्तर पार के जवाब में हमारा तो नारा था इस बार रघुबर पार। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे गठबंधन की जीत होगी। हमें पूरा बहुमत मिलेगा और हम सरकार पूरी मजबूती के साथ बनाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें