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झामुमो को कांग्रेस नहीं दे रही तवज्जो

Thu, 13 Dec 2012 10:54 AM IST
रांची/इंटनेट डेस्क
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भाजपा के साथ खटपट की स्थिति में कांग्रेस के साथ सत्ता चलाने के झामुमो के विकल्प को फिलहाल कोई खास रिस्पांस मिलता नहीं दिख रहा है। दो दिन से नई दिल्ली में जमे झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन की अभी तक कांग्रेस के किसी बड़े नेता से मुलाकात तक नहीं हो पाई है। झामुमो नेताओं के अनुसार शिबू संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए गए हैं लेकिन वे भविष्य की संभावनाएं न टटोलें, ऐसा संभव नहीं।
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राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव से लेकर एफडीआई पर वोटिंग तक झामुमो ने कांग्रेस का साथ दिया है। उधर, झारखंड कांग्रेस के प्रभारी डॉ. शकील अहमद झामुमो-भाजपा की खटपट को रोजमर्रा की बात बताते हुए कहते हैं कि जब से राज्य का प्रभार मिला है, तब से 28-28 माह का शिगूफा सुन रहा हूं। जहां तक विकल्प का सवाल है तो राजनीति में कुछ भी संभव है लेकिन अभी तक कांग्रेस आलाकमान ने इस संबंध में कोई उत्सुकता नहीं दिखाई है।

कांग्रेस के शांत रहने की कई वजहें भी हैं। पार्टी राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। झाविमो के साथ उसका गठबंधन भी दम तोड़ चुका है। ऐसे में अगर भाजपा का साथ छोड़ झामुमो ने कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया तो सत्तासुख पार्टी के नेता नहीं छोड़ना चाहेंगे। इसके लिए भी उनको कई पापड़ बेलने होंगे। यह भी संभव है कि कांग्रेस बाहर से झामुमो को समर्थन दे। अगर ऐसा न हुआ और भाजपा से झामुमो के संबंध टूट गए तो भी कांग्रेस के हाथ में लड्डू है।
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राष्ट्रपति शासन लागू होने की स्थिति में परोक्ष रूप से शासन की कमान कांग्रेस के हाथ में ही रहेगी। यूं, माना यही जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता सरकार बनाने की संभावनाएं टटोलने के लिए दिल्ली में जमे हुए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप कुमार बलमुचू दिल्ली में ही हैं।
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