झारखंड की कदनी देवी के छह साल पुराने जख्म भरे भी न थे कि उन्हें फिर से कुरेदा गया। उन्हें पंचायत में कथित रूप से डायन बताकर उनके बाल काट दिए गए, बुरी तरह पिटाई की गई, कपडे खोल दिए गए और परिजनों के सामने सरेआम गांव में घुमाया गया।
ये घटना झारखंड के आदिवासी बहुल लोहरदगा जिले के कुडू थाना क्षेत्र के टाटी डुमरटोली गांव की है।
पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
कुडू थाना प्रभारी पतरस नाग ने बताया, “पीडिता के बेटे उमेश मुंडा के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। ”
इस मामले में गांव के 17 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है।
पुलिस के मुताबिक, “गांव के ही बलींद्र उरांव, भुगलु उरांव, भोला मुंडा, सावित्री देवी गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।”
पुलिस ने बताया कि पीडिता के पति, बेटे और बेटी ने किसी तरह भागकर थाने में सूचना दी थी। उसके बाद पुलिस वहां पहुंची।
पीडिता को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पिटाई की वजह से उनके शरीर पर कई जख्म हैं।
पंचायत
टाटी डुमरटोली गांव के मुखिया बंदे पाहन कहते हैं कि उनकी सहमति के बिना पंचायत बिठाकर इस तरह की सजा दी गई।
उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही गांववालों को समझाया था कि पीडिता को कोई तंग न करे।”
मुखिया ने ये भी कहा, “इस तरह के पंचायती फैसले गलत हैं। अब कानून अपना काम करे, यह जरूरी है।”
पीडिता के पति दुतिया मुंडा एक साधारण किसान हैं। बेटे भी खेती-बाडी करते हैं। पीडिता के पुत्र उमेश मुंडा के मुताबिक छह साल पहले भी उनकी मां की कथित तौर पर डायन बताकर सरेआम पिटाई की गई थी।
उमेश मुंडा ने बताया कि उन्होंने अपनी बहन के साथ मिलकर मां को बचाने का प्रयास किया लेकिन गांव वालों ने उन्हें खदेड कर भगा दिया। उनकी मां गुहार लगाती रही, लेकिन उन्हें बुरी तरह प्रताडित किया गया।
पुलिस के मुताबिक, "पांच नवंबर की सुबह गांव में पंचायत बिठाई गई जिसमें कदनी देवी को सजा सुनाई गई। इससे पहले चार नवंबर को गांव में दिवाली का जतरा (मेला) लगा था। जतरा में ही पीडिता का कुछ ग्रामीणों के साथ विवाद हो गया था। इसके बाद अगले दिन सुबह में गांव की बैठक में यह फैसला सुनाया गया।”
पुलिस का दावा है कि इनमें गांव की कई महिलाएं भी शामिल थीं।
पूर्व की घटना
इससे पहले भी लोहरदगा से सटे गुमला जिले में ऐसी ही घटना हुई थी जब लेमहा गांव में एक विधवा महिला को डायन बताकर उनकी हत्या कर दी गई थी।
उस मामले में कथित अभियुक्त सुधवा मुंडा ने खुद थाने जाकर समर्पण कर दिया था।
पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक सुधवा मुंडा के एक बच्चे की मौत हो गई थी और उन्हें शक था कि उसी महिला ने कोई जादू-टोना कर दिया था जिससे बच्चों की मौत हो गई।
झारखंड में पिछले आठ महीने में डायन बताकर 40 महिलाओं की हत्या कर दी गई है।
यह रिपोर्ट जनवरी से अगस्त तक की है। झारखंड पुलिस की मासिक अपराध रिपोर्ट में ये आंकडे दर्ज हैं।
ऐसी अधिकतर हत्याएं आदिवासी बहुल इलाकों में हुई हैं।
रांची इंस्टीटयूट ऑफ न्यूरो साइकिएट्री एंड एलायड साइसेंज के निदेशक सह मनोवैज्ञानिक डॉ। अमूलरंजन सिंह कहते हैं, “किसी की बीमारी या मौत में भूत-प्रेत, ओझा-गुनी की कोई भूमिका नहीं होती। लेकिन गांवों में अब भी तरह-तरह की भ्रांतिया हैं। इसे जागरूकता के जरिए ही दूर किया जा सकता है।
सामाजिक संगठन
महिला कार्यकर्ता लखी दास कथित डायन प्रथा के खिलाफ कोल्हान इलाके में काम करती हैं। वो कहती हैं, “इन मामलों में विधवाओं को ज्यादा ही प्रताडित किया जाता है। जनजातीय गांवों में अब भी अंधविश्वास का असर गहरा है।”
उन्होंने बताया कि अध्ययन में पाया गया है कि महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर मैला पिलाया जाता है, उनके बाल काट दिए जाते हैं और उन्हें निर्वस्त्र कर घुमाया जाता है। लेकिन सुदूर इलाकों में होनेवाली प्रताडना की अधिकतर घटनाएं प्रकाश में नहीं आतीं।
झारखंड सरकार ने डायन प्रथा उन्मूलन की योजना बनाई है। इस योजना के नाम पर हर साल बीस लाख रुपए खर्च किए जाते हैं।
महिला कार्यकर्ता लखी दास कहती हैं कि सरकार की योजना कारगर नहीं है। इस प्रथा पर रोक के लिए बडे पैमाने पर काम करने की जरूरत है।