इंटरनेट क्या है? गूगल क्या है? इससे हम कुछ भी जान लेते हैं। यह ऑनलाइन एनसाइक्लोपीडिया है। विकीपीडिया क्या है? इसमें सब कुछ है। अरे वाह। यह तो कमाल है। इसमें मेरा गाँव हुटुप खोजिए। सॉरी। हुटुप यहां नहीं है। क्यों? इसके बारे में किसी ने यहां कुछ नहीं डाला। क्या हम हुटुप को इसपर डाल सकते हैं।
हां, कोई भी डाल सकता है। ये तो अच्छा है। तो, चलिए अपने हुटुप को विकीपीडिया पर डालते हैं। यह संवाद एक महीने पहले हुटुप के युवा स्कूल में कंप्यूटर लैब बनाने आए विशेषज्ञों और यहां पढ़ने वाली लड़कियों के बीच का है। अब हुटुप विकीपीडिया पर है।
रांची से सटे ओरमांझी प्रखंड का एक गाँव है हुटुप। रांची-पटना हाइवे के किनारे बसा यह गाँव झारखंड के दूसरे गाँवों की तरह ही है। ग़रीबी, अशिक्षा, कुपोषण, घरेलू हिंसा, टूटी सड़कों और ऐसी कई समस्याएं, हुटुप के बायोडेटा में भी यही सारी बातें लिखी हैं।
साथ में यह भी कि यहां की कुछ लड़कियाँ कमाल कर रही हैं। वो अमरीका और स्पेन घूम चुकी हैं। अंग्रेज़ी बोलती हैं, पढ़ती हैं और पढ़ाती भी हैं। 15 अगस्त 2015 के पहले हुटुप विकीपीडिया पर नहीं था। उन्हीं दिनों यहां के युवा स्कूल में कंप्यूटर लैब बना, इंटरनेट आया। फिर शुरू हुआ विकीपीडिया पर हुटुप का सफऱ। अब विकीपीडिया पर हुटुप का अपना एक पेज है। लड़कियों ने गाँव के मंदिर, स्कूल, अस्पताल आदि की तस्वीरें इस पेज पर डाली हैं।
एनजीओ के इंटर्न के तौर पर झारखंड आए
युवा स्कूल की चाइल्ड डेवलपमेंट आफ़िसर निहारिका बाखला ने बीबीसी को बताया कि 5 से 15 साल की इन लड़कियों में विकीपीडिया को लेकर बड़ा उत्साह है। इन्हें खुशी है कि दुनिया के किसी कोने में बैठे लोग अब इंटरनेट पर उनके गाँव को खोज सकते हैं।
अमरीका के मिनोसोटा निवासी 33 साल के फ्रेंज गेसलर बोस्टन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 2009 मे एक एनजीओ के इंटर्न के तौर पर झारखंड आए। फिर यहीं के होकर रह गए। फ्रेंज ने बताया कि उन्हें लगा कि झारखंड में ज़्यादा काम करने की ज़रूरत है। इसके बाद उन्होंने हुटुप में युवा स्कूल खोला।
अब पास के गाँव हिसातु में भी इसकी शाखा है। हुटुप को विकीपीडिया पर लाने का काम इसी युवा स्कूल की लड़कियाँ कर रही हैं। अमरीका से दो महीने पहले ही भारत आईं फ़्रीडा फ़ेन उन्हें इसकी ट्रेनिंग दे रही हैं। फ़्रीडा ने बीबीसी को बताया कि उन्हें ऐसा करके बहुत अच्छा लग रहा है। इन लड़कियों में उत्साह है और ये टैलेंटेड हैं।
महिला अशिक्षा का दंश
निहारिका बाखला ने बताया हुटुप मे महिला शिक्षा को लेकर जागरूकता की कमी थी। गाँव के कुछ लोग लड़कियों को पढ़ाने का अब भी विरोध करते हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक़, झारखंड में प्रति 10 में 6 लड़कियों की पढ़ाई छुड़वा कर उनकी शादी करा दी जाती है।
वो कहती हैं कि मानव तस्करी भी बड़ा मुद्दा है। ऐसे में लड़कियों को पढ़ाने के लिए उनके मां-बाप को मनाना कठिन था, क्योंकि ऐसा करने से उनके घर में काम करने वाले की कमी हो जाएगी।
फिर फ़ुटबॉल के जरिए पढ़ाई में इनकी रुचि पैदा हुई। युवा स्कूल की इन लड़कियों में से 18 ने सन् 2013 में स्पेन में आयोजित गैस्टिज कप प्रतियोगिता में ब्रांज मेडल जीता था। दूसरी 18 लड़कियां 2014 में अमेरिका गईं, वहां के यूएसए कप में बेहतर प्रदर्शन किया।