केंद्र सरकार के आदेश के बाद भी अनुराग गुप्ता को डीजीपी पद से नहीं हटाया गया है। इस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सवाल खड़ा कर झारखंड सरकार के नियत पर सवाल उठाया है। भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। वहीं बाबूलाल मरांडी के बयान पर पलटवार करते हुए झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने कहा बाबूलाल मरांडी को शायद याद नहीं है कि उन्होंने अपने शासनकाल में कितनी बार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया था। कितने संवैधानिक पदों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया था।
झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता को लेकर चल रही विवाद थमने का नाम नहीं ले रही है। केंद्र सरकार के आपत्ति के बाद भी राज्य सरकार के निर्देशानुसार अनुराग गुप्ता झारखंड के डीजीपी के तौर पर सेवा दे रहे हैं इस मामले पर अब राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार के फैसले पर विरोध जताते हुए कहा है निर्लज्जता की भी एक हद होती है, पर झारखंड सरकार ने तो उसे भी पार कर दिया है। झारखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां बीते दस दिनों से डीजीपी का पद खाली है और अनुराग गुप्ता‘डीजीपी’ जैसे काम कर भी रहे हैं, वो बिना वेतन के सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा ये तो नया भारत निर्माण‘बिना वेतन, बिना संवैधानिक वैधता, सिर्फ भ्रष्टाचार के दम पर प्रशासन।
झारखंड सरकार पर तंज कसते हुए बाबूलाल ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार ने न केवल संविधान के अनुच्छेद 312 को नकारा है, जो UPSC को अधिकार देता है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह केस के निर्देशों को भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया है।
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झामुमो केंद्रीय महासचिव विनोद पाण्डे ने झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता प्रकरण पर भाजपा के आरोपों का खंडन करते हुए कहा बाबूलाल मरांडी अब झारखंड की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बचाने के लिए बेबुनियाद आरोपों का सहारा ले रहे हैं। डीजीपी पद पर नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चल रही सरकार पर सवाल उठाने से पहले उन्हें अपनी पार्टी के अंदर झांककर देख लेना चाहिए।
झारखंड में आज जिन मुद्दों पर मरांडी शोर मचा रहे हैं, वे उन्हीं के शासनकाल की देन हैं। तब के भ्रष्टाचार और नौकरशाही के खेल ने ही आज प्रशासनिक व्यवस्था को इस स्थिति में ला खड़ा किया है। लेकिन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दमदार नेतृत्व में राज्य का सही दिशा में विकास हुआ है। आज हर वर्ग के चेहरे पर मुस्कान देखने को मिल रही है। विनोद पांडे ने पलटवार करते हुए कहा संविधान और सुप्रीम कोर्ट का हवाला देने से पहले बाबूलाल मरांडी ये भी बताएं कि उन्होंने अपने शासनकाल में कितनी बार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया था। कितने संवैधानिक पदों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया था।
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क्या है मामला?
ज्ञात हो केंद्र सरकार ने झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता के सेवानिवृत्त होने को लेकर राज्य सरकार को पत्र भेजकर जानकारी दी थी कि 30 अप्रैल तक ही अनुराग गुप्ता झारखंड डीजीपी के तौर पर सेवा दे पाएंगे। लेकिन झारखंड सरकार ने इसे खारिज करते हुए अनुराग गुप्ता को झारखंड डीजीपी के तौर पर कार्य करने की अनुमति दी। साथ ही साथ राज्य सरकार के ओर से केंद्र सरकार को चिठ्ठी लिखी गई, जिसमें बताया गया कि डीजीपी के पद पर अनुराग गुप्ता की नियुक्ति कानूनी तरीके से 2 साल के लिए की गई है और यह फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया गया है। वहीं, डीजीपी की नियुक्ति को लेकर एक मामला कोर्ट में भी चल रहा है, जिसमें आदेश आना बाकी है। आदेश आने तक अनुराग गुप्ता डीजीपी के पद पर सेवा दे सकते हैं यह न्याय संगत है।