झारखंड हाईकोर्ट ने करीब तीन दशक पुराने अलकतरा घोटाले की धीमी सुनवाई पर नाराजगी जताते हुए सीबीआई की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। वर्ष 1997 में सामने आए इस मामले में 32 लोग आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से 12 की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है। अब 20 आरोपियों पर सुनवाई जारी है।
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झारखंड उच्च न्यायालय ने लगभग तीन दशक पुराने अलकतरा घोटाले की धीमी सुनवाई और सांसदों-विधायकों से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो की सुस्त कार्यशैली पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी की कि जांच एजेंसियां केवल दस्तावेज जुटाने में ही पूरी उम्र निकाल देती हैं।
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वर्ष 1997 में एकीकृत बिहार के दौरान उजागर हुए इस अलकतरा घोटाले में तत्कालीन मंत्री इलियास हुसैन सहित कुल 32 लोगों को आरोपी बनाया गया था। न्याय की इस लंबी प्रक्रिया में फैसले का इंतजार करते-करते 12 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि बाकी बचे 20 लोगों पर आज भी मुकदमा चल रहा है।
निचली अदालत से मांगे रिकॉर्ड
जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की पीठ ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए निचली अदालत से दो मामलों के रिकॉर्ड तलब किए हैं। सुनवाई के दौरान जब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने यह दलील दी कि कई मामलों में गवाह अपने पते पर नहीं मिल रहे हैं, तो अदालत ने इस पर गहरी असंतुष्टि प्रकट की।