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झारखंड: लालगढ़-पांजरीकला रेलवे अंडरपास निर्माण चार महीने में करना होगा पूरा, झारखंड हाई कोर्ट का निर्देश

Sun, 18 Oct 2026 11:54 AM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

पलामू में लालगढ़ बिहार और पांजरीकला गांव के बीच बन रहे रेलवे अंडरपास के निर्माण में देरी और बरसात में जलभराव की समस्या पर झारखंड हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। अदालत ने रेलवे को चार महीने के भीतर निर्माण पूरा करने और पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान निकालने का निर्देश दिया है।
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झारखंड हाई कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पलामू जिले के लालगढ़ बिहार और पांजरीकला गांव के बीच बन रहे रेलवे अंडरपास के निर्माण में हो रही देरी तथा बरसात के समय जलभराव की समस्या पर झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने रेलवे प्रशासन को इस अंडरपास का निर्माण अधिकतम चार माह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने बरसात के दौरान अंडरपास में पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के आदेश दिए हैं, ताकि ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को रेलवे लाइन पार करते समय जोखिम न उठाना पड़े।
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ग्रामीणों और बच्चों की परेशानी
लालगढ़ वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष कामेश्वर सिंह ने जनहित याचिका दायर कर पांजरीकला गांव के पास रोड ओवरब्रिज या रेलवे क्रॉसिंग बनाने की मांग रखी थी। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि सुरक्षित मार्ग न होने से ग्रामीण लंबे समय से अनधिकृत तरीकों से रेलवे लाइन पार कर रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रेलवे की ओर से बनाया जा रहा सीमित ऊंचाई वाला अंडरपास वर्षा ऋतु में पानी से भर जाता है। इसके कारण ग्रामीणों तथा स्कूली बच्चों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। याचिका में निर्माण पूरा कराने के साथ-साथ जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने का आग्रह किया गया था।

जनहित में सार्वजनिक धन खर्च हो रहा है, तो मकसद पूरा हो
सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह ने अदालत को सूचित किया कि किलोमीटर 307/31 से 308/01 के मध्य सीमित ऊंचाई वाले अंडरपास का निर्माण चल रहा है, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता मिल सके। रेलवे ने बताया कि अपनी नीति के तहत नए स्तर के क्रॉसिंग खोलने के स्थान पर पुराने क्रॉसिंग को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है तथा स्थल की परिस्थितियों के अनुसार ही अंडरपास या ओवरब्रिज का निर्माण होता है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों की राय और नीतिगत मामलों में ओवरब्रिज बनाने का निर्देश देने के लिए परमादेश जारी नहीं हो सकता। हालांकि अदालत ने कहा कि जब जनहित में सार्वजनिक धन खर्च हो रहा है, तब योजना का मूल उद्देश्य पूरा होना जरूरी है।
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अनुपालन रिपोर्ट और अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मामले का निपटारा करते हुए रेलवे के संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य पूरा होने के बाद रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने रेलवे प्रशासन को 12 मार्च, 2027 तक अपना अनुपालन शपथ पत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इसके अतिरिक्त रजिस्ट्री आदेश के पालन की समीक्षा हेतु इस प्रकरण को 18 मार्च, 2027 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी। इस मामले में राज्य सरकार का पक्ष अधिवक्ता शहबाज अख्तर ने प्रस्तुत किया।
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