झारखंड उच्च न्यायालय ने रिम्स में रोगियों को मिल रही सुविधाओं को लेकर सुधार की गति को बहुत धीमा बताया है और इस प्रक्रिया पर असंतोष व्यक्त करते हुए रिम्स के निदेशक को चार नवंबर को अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।
उच्च न्यायालय ने रिम्स में व्यवस्था सुधार मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को यह निर्देश दिया। अदालत ने रिम्स के अधिकारियों से पूछा है कि अस्पताल के चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर कैसे रोक लगेगी और यह सब करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि रिम्स के चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का काम अस्पताल निदेशक का है। अदालत ने टिप्पणी की कि अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा मरीजों के परिजनों से कुछ उपकरण बाहर से मंगाए जाते हैं। इन उपकरणों के मूल्य की सूची रिम्स को जारी करनी चाहिए, ताकि मरीजों को उचित मूल्य पर ये उपकरण मिल सकें।
पीठ ने मामले में केंद्र सरकार को भी प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। अस्पताल की ओर से पेश अधिवक्ता डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई रिम्स की जनरल बॉडी कर सकती है।