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झारखंड : रघुवर दास के खिलाफ दायर शिकायत वापस लेंगे हेमंत सोरेन

Fri, 27 Dec 2019 02:52 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
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हेमंत सोरेन और रघुबर दास (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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झारखंड के आगामी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कामचलाऊ सीएम रघुवर दास के खिलाफ दायर शिकायत को वापस लेंगे। झामुमो के एक पदाधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। दास पर सोरेन की 19 दिसंबर को दी शिकायत के आधार पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज हुआ था। 

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सोरेन ने दास के खिलाफ थाना दुमका में दर्ज शिकायत दर्ज में कहा था कि दास ने एक चुनावी सभा में उनके (हेमंत) खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। सोरेन की शिकायत को जामताड़ा के मिहिजाम थाने के पास भेजी गई और केस दर्ज किया गया। झारखंड चुनाव के दौरान रघुवर दास ने सोरेन की जाति को लेकर अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया था। तब दास सीएम थे और सोरेन सत्ता से बाहर पर अब मंजर पूरी तरह पलट गया है।

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हेमंत सोरेन 29 को लेंगे झारखंड के सीएम पद की शपथ

जेएमएम के नेतृत्व वाले गठबंधन के मुख्यमंत्री के तौर पर हेमंत सोरेन 29 दिसंबर को शपथ ग्रहण करेंगे। गठबंधन ने सत्ताधारी भाजपा को पूरी तरह परास्त करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। बृहस्पतिवार को राजभवन की तरफ से शपथ ग्रहण कार्यक्रम की जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि 29 दिसंबर को दोपहर 2 बजे राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू की तरफ से हेमंत सोरेन को शपथ ग्रहण कराई जाएगी।

यह कार्यक्रम जारी होने के बाद मुख्य सचिव डीके तिवारी ने हेमंत सोरेन के कांके रोड स्थित आवास पर पहुंचकर उन्हें शपथ ग्रहण समारोह का आमंत्रण सौंप दिया। दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभालने जा रहे हेमंत का शपथ ग्रहण कार्यक्रम यहां के मोराबड़ी मैदान में ही आयोजित किया जाएगा। 

सोरेन ने 24 दिसंबर को राज्यपाल से राजभवन में मुलाकात करते हुए उन्हें 50 विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंपा था और सरकार बनाने का दावा पेश किया था। जेएमएम की तरफ से भी बृहस्पतिवार को इस बात की पुष्टि कर दी गई कि राज्यपाल ने सोरेन को मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करने का आमंत्रण भेज दिया है।

जेएमएम-कांग्रेस-राजद की तिकड़ी वाले गठबंधन ने 23 दिसंबर को आए विधानसभा चुनाव परिणामों में सत्ताधारी भाजपा को बड़े पैमाने से पछाड़कर बहुमत हासिल कर लिया था। साथ ही भाजपा को लोकसभा चुनावों की जबरदस्त जीत के बाद हिंदी भाषी क्षेत्र में एक और राज्य अपने हाथ से खोने के लिए मजबूर कर दिया था। 

गठबंधन को 81 सदस्यों वाली विधानसभा में 47 सीट पर जीत मिली थी, जिसमें जेएमएम ने 30, कांग्रेस ने 16 और राजद ने एक सीट पर कब्जा किया था। बाद में जेवीएम (पी) के भी तीनों विजेता विधायकों ने गठबंधन को अपना समर्थन दे दिया था। इसके उलट भाजपा को महज 25 सीट और सरकार में उसके सहयोगी रहे आजसू को 2, भाकपा-माले व एनसीपी को 1-1 सीट पर जीत मिली थी।
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