मंत्री बन्ना गुप्ता के आरोपों पर खूंटी के उपायुक्त शशि रंजन ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन केवल कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है। आयोजन के लिए निमंत्रण केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा भेजा गया था, जिला प्रशासन का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं था।
झारखंड सरकार और केंद्र के बीच चल रही खींच-तान थमती नहीं दिख रही है। इस बीच, हेमंत सोरेन सरकार के मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्र सरकार द्वारा खूंटी जिले में आयोजित स्वास्थ्य शिविर का बहिष्कार करके बयानबाजी के दौर को हवा दे दी है। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में कार्यक्रम होने के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया था।
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मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्र सरकार पर किया हमला
उन्होंने कार्यक्रम को लेकर केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोजकों ने मंच पर मेरा पोस्टर लगाया था, लेकिन मुझे यह देखकर दुख हुआ कि न तो हमारे सीएम को आमंत्रित किया गया था और न ही उनका पोस्टर लगाया गया था। उन्होंने कहा कि हमारी एक चुनी हुई सरकार है और हेमंत सोरेन हमारे नेता हैं। मैं उनका कोई अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री का अपमान राज्य का अपमान करने के समान है। झारखंड के मंत्री बन्ना गुप्ता ने आरोप लगाया कि केंद्र ऐसे कार्यक्रमों से राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, 'लोकतांत्रिक व्यवस्था में केंद्र और राज्य के बीच मतभेद कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसके बहाने नफरत या किसी का अपमान करना स्वीकार्य नहीं है।
कार्यक्रम स्थल तक जाकर वापस लौटे मंत्री
दरअसल, रविवार को खूंटी कस्बे के बिरसा कॉलेज ग्राउंड में केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय द्वारा एक दिवसीय मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में उपायुक्त द्वारा झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को निमंत्रण दिया गया था। निमंत्रण मिलने के बाद खूंटी कस्बे के बिरसा कॉलेज ग्राउंड में कार्यक्रम स्थल पर गए, लेकिन मंच पर नहीं गए और कार्यक्रम में शामिल हुए बिना वापस लौट आए। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा थे। उनके अलावा कार्यक्रम में राज्यपाल रमेश बैस भी शामिल हुए थे।
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खूंटी के उपायुक्त शशि रंजन ने दी सफाई
मंत्री बन्ना गुप्ता के आरोपों पर खूंटी के उपायुक्त शशि रंजन ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन केवल कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में जिले भर से 50,000 से अधिक आदिवासियों ने भाग लिया है। उन्होंने कहा कि आयोजन के लिए निमंत्रण केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा भेजा गया था, जिला प्रशासन का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं था।