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तेजाब में झुलसी सोनाली को सरकारी नौकरी का 'मरहम'

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तेजाब ने सोनाली का चेहरा जला दिया, आंखों की रोशनी छीन ली। सुनहरे भविष्य के तानेबाने को खत्म कर दिया।
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पर तमाम जख्मों ने उनके सीने को फौलाद बना दिया।वह 10 सालों से संघर्ष कर रही हैं।

झारखंड सरकार ने अब सोनाली मुखर्जी को नौकरी देने को मंजूरी दी है।

सरकार के इस फैसले पर सोनाली की पहली प्रतिक्रिया थी, "धन्यवाद। आगे अभियुक्तों को सजा दिलाने की लडाई बाकी है।"

इच्छामृत्यु की मांग

सोनाली झारखंड के एक छोटा कस्बा कसमार की रहने वाली हैं। उनके पिता धनबाद में मामूली नौकरी करते थे। 22 अप्रैल, 2003 की रात सोनाली के साथ एक दर्दनाक हादसा हुआ।

वो अपने घर की छत पर सोई थीं। तीन युवकों ने उनके चेहरे पर तेजाब उडेल दिया। उनके शरीर का सत्तर फीसदी हिस्सा बुरी तरह जल गया। आंखों की रोशनी चली गई।

सोनाली बताती हैं कि तब वह स्नातक की छात्रा थीं। उनकी उम्र 17 साल थी। वह अपने कॉलेज में एनसीसी की कैप्टन भी थीं।

इस मामले में कथित अभियुक्त जेल भेजे गए। बाद में उनकी जमानत हो गई। सोनाली के पिता ने उच्च न्यायालय और अन्य जगहों पर उन्हें सजा दिए जाने की अपील की।

इस घटना के बाद सोनाली का पूरा परिवार टूट गया। वह बताती हैं कि इलाज महंगा होने की वजह से उनके परिवार को काफी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पडा।

इस क्रम में उनकी मां नीलिमा मुखर्जी के जेवर बिक गए, जमीन बिक गई। इस घटना से उनके दादा अवसाद में चले गए। मां भी लंबे दिनों से हैरान-परेशान हैं।

घटना के तीन साल बाद तक उनकी मन: और शारीरिक स्थिति कुछ करने लायक नहीं थी। वो गहरे सदमे में थीं।

सोनाली के मुताबिक तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच ऐसे कई मौके आए जब वो जिंदगी से हताश, निराश हो गईं। कई बार जीने की तमन्ना खत्म हो गई। ऐसा भी दौर आया जब उन्होंने सरकार से इच्छा मृत्यु की मांग की।
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हौसले की तारीफ

लेकिन पिता ने हर पल उनके साथ दिए। बकौल सोनाली, "पिता के सहारे और हौसले से वो उबरती रहीं। उनकी मदद के लिए हाथ भी बढे।"

इसके बाद उन्होंने न सिर्फ जीने की ठानी बल्कि यह भी फैसला किया कि कथित अभियुक्तों को वे सजा दिलाएंगी ।

सोनाली कहती हैं उनकी दिली तमन्ना है कि वो तेजाब पीडिताओं के लिए कुछ करें, लेकिन इसके लिए उन्हें एक मंच की जरूरत है।

वह चाहती हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और अत्याचार के मामलों में सख्त कानून बने।

वह पूछती हैं, "क्या किसी लडकी के जीवन को बर्बाद करने का हक किसी को है?"

सोनाली मुखर्जी फिलहाल दिल्ली में इलाज करा रही हैं। साथ में उनके पिता भी हैं। वह पहले से बेहतर महसूस कर रही हैं।

अब तक उन्हें 22 बार प्लास्टिक उन्हें सर्जरी से गुजरना पडा है।

सोनाली पिछले साल नवंबर में टीवी शो कौन बनेगा करोडपति में भी आईं। यहां तक लाने में उनकी मदद लारा दत्ता भूपति ने की। इस शो में सोनाली ने 25 लाख रुपये जीते।

केबीसी पर अमिताभ बच्चन ने भी सोनाली के हौसले की तारीफ की।

मददगार

सोनाली के मुताबिक दुनिया में कुछ लोग दर्द तो देते हैं, लेकिन मदद करने वालों की भी कमी नहीं। उन्हें समाज का हमेशा साथ मिला।

फिल्म अभिनेत्री जूही चावला ने भी उनकी मदद के लिए सकारात्मक पहल की है।

सितंबर, 2012 में सोनाली ने झारखंड सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा से मिलकर नौकरी की मांग की थी। इससे पहले वह हर स्तर पर अधिकारियों से मिलती रहीं। मदद की गुहार लगाई।
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मुंडा ने उसी समय उन्हें नौकरी देने के लिए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था। लेकिन यह कार्रवाई करने में सरकार को पूरे 14 महीने लगे।

सरकार से भरोसा मिलने के बाद लंबे समय तक नौकरी नहीं मिलने से सोनाली दुखी भी थीं लेकिन वो थकी नहीं, चुप बैठी नहीं। सरकार को याद दिलाती रहीं। कभी अपने स्तर से, कभी मीडिया के जरिए।

सरकार में किस तरह का काम करना चाहती हैं, पूछे जाने पर सोनाली ने कहा, अभी वो कंप्यूटर की शिक्षा हासिल कर रही हैं।

वो चाहती हैं कि उन्हें फोन या कंप्यूटर पर ही काम मिले।

सोनाली के मुताबिक उनके घर वालों ने दस सालों में जितनी पीडा सही है, वे चाहती हैं कि जितनी जल्दी हो, मां-पिता का, भाई बहनों का जीवन सामान्य हो सके।

उनके पिता चंडीदास मुखर्जी ने कहा, "सोनाली को मदद की दरकार थी।"

इस बीच झारखंड सरकार की महिला कल्याण मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा है कि सोनाली को उनकी इच्छानुरूप ही काम दिए जाएंगे।

"पीडित महिलाओं को हर स्तर पर इंसाफ मिलना चाहिए।"
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