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झारखंड में सरगर्मी बढ़ी: राज्यपाल पहुंचे दिल्ली, सोरेन सरकार पर संकट के बीच राजभवन पर निगाहें

Sat, 03 Sep 2022 08:49 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची/नई दिल्ली

सार

दरअसल, ये पूरा संकट झारखंड के खदान लीज आवंटन मामले से जुड़ा है। यह मामला अदालतों के गलियारों में लंबित हैं, वहीं चुनाव आयोग ने मामले की सुनवाई कर सोरेन की विधायक पद से अयोग्यता को लेकर सिफारिश राज्यपाल रमेश बैस को भेज दी है।

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झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस - फोटो : social media
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विस्तार
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झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को लेकर बीते एक सप्ताह से जारी असमंजस जल्द खत्म हो सकता है। राज्यपाल रमेश बैस शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे हैं। वे केंद्र सरकार के साथ परामर्श के बाद कोई फैसला ले सकते हैं। ऐसे में सब की निगाहें राजभवन से सोरेन को मिलने वाले फरमान पर टिकी है। हालांकि, सीएम सोरेन ने गठबंधन सरकार बचाने के पूरे इंतजाम कर लिए हैं। देखना होगा कि झारखंड की गठबंधन सरकार इस संकट से कैसे उबरती है?

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दरअसल, ये पूरा संकट झारखंड के खदान लीज आवंटन मामले से जुड़ा है। यह मामला अदालतों के गलियारों में लंबित हैं, वहीं चुनाव आयोग ने मामले की सुनवाई कर अपनी सोरेन की विधायक पद से अयोग्यता को लेकर सिफारिश राज्यपाल रमेश बैस को अगस्त के आखिरी सप्ताह में भेज दी है। इसके बाद करीब एक हफ्ता बीत गया है और सोरेन सरकार को लेकर असमंजस गहराता जा रहा है। 

राज्यपाल को लेना है फैसला
सोरेन सरकार के भविष्य का फैसला राज्यपाल को लेना है। अब तक राज्यपाल ने चुनाव आयोग की रिपोर्ट पर कोई फैसला नहीं किया है। केंद्र से परामर्श के बाद वे जल्द निर्णय ले सकते हैं। बैस किसी फैसले से पहले दिल्ली में कानूनी जानकारों से भी मशवरा कर सकते हैं।
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आप लोगों के होते हुए हमें घबराने की जरूरत नहीं: सोरेन
झारखंड में सरकारी कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री आवास पर थैंक्स गिविंग प्रोग्राम आयोजित किया। इस दौरान झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि जब मैं आप लोगों के बीच आया था तब मैंने कहा था कि मैं बोलने में विश्वास नहीं रखता मैं काम करने में विश्वास रखता हूं। हम जो कहते हैं उसे हम जरूर पूरा करते हैं। मैं चाहता हूं कि इस राज्य के लोगों के चेहरे पर मुस्कान हो। ये देश का पहला राज्य बना जहां पूरे राज्य में बुजुर्गों को यूनिवर्सल पेंशन मिलती है। हम राज्य के सभी वर्गों की समस्याओं का समाधान करेंगे। बहुत सारे लोग चारो तरफ से हमें गिराने और कमजोर करने में लगे हुए हैं, लेकिन आप लोगों के होते हुए हमें घबराने की जरूरत नहीं है। 

...तो देना पड़ेगा सोरेन को इस्तीफा
माना जा रहा है कि यदि राज्यपाल ने चुनाव आयोग की सिफारिश स्वीकार कर ली तो सोरेन को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। इससे राज्य की मौजूदा गठबंधन सरकार मुश्किल में आ जाएगी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि चुनाव आयोग ने सोरेन को लेकर क्या क्या सिफारिशें की हैं।  
माना जा रहा है कि आयोग ने सोरेन को विधायकी से अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की है। यदि आयोग ने उन्हें कुछ वर्षों तक चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिया तो झामुमो-कांग्रेस गठबंधन सरकार को नया सीएम चुनना पड़ेगा। यह भी कहा जा रहा है कि सोरेन को सिर्फ मौजूदा कार्यकाल के लिए अयोग्य करार दिया तो वे इस्तीफा देकर फिर सीएम पद की शपथ लेने के बाद छह माह में फिर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंच सकते हैं। 

यह है सीएम पर आरोप
हेमंत सोरेन पर लाभ के पद पर रहते हुए झारखंड की खदान की लीज का पट्टा हासिल करने का आरोप है। यह मामला ईडी व सीबीआई जांच के अधीन होकर अदालत में भी लंबित है। सोरेन के खिलाफ भाजपा ने राज्यपाल को शिकायत की थी। भाजपा ने खदान का पट्टा प्राप्त करने के लिए सोरेन को विधायक पद से अयोग्य घोषित करने की मांग की थी।  राज्यपाल रमेश बैस ने पूर्व सीएम रघुबर दास की इस शिकायत को 28 मार्च को चुनाव आयोग को भेजा था। इसके बाद चुनाव आयोग ने मामले की सुनवाई की थी। हालांकि, सीएम सोरेन का कहना है कि उन्होंने खदान के पट्टे को सरेंडर कर दिया था। 

झामुमो के विधायक पहुंचे रायपुर
उधर, झारखंड में राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना के चलते सीएम हेमंत सोरेन ने 33 विधायकों (19 झामुमो विधायक, कांग्रेस के 13 और राजद के एक) को रायपुर भेज दिया है। गठबंधन को आशंका है कि भाजपा राजनीतिक जोड़-तोड़ के जरिए उसकी सरकार को गिरा सकती है। इसलिए उसने अपनी पालबंदी मजबूत कर ली है। गठबंधन ने सोरेन के स्थान पर नया नेता चुनकर सरकार बचाने के विकल्पों पर भी विचार किया है। 

कल्पना सोरेन बनेंगी नई सीएम?
यदि सोरेन को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा तो कहा जा रहा है कि वे अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को उत्तराधिकारी बना सकते हैं। बिहार में जब 1997 में सीएम लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में पद छोड़ना पड़ा था तो उन्होंने यही दांव चलकर पत्नी राबड़ी देवी को सीएम बना दिया था। 

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