झारखंड के आदिवासी बहुल जिले में रहने वाला एक गरीब परिवार अजीब मुसीबत से गुजर रहा है। उस पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर के इकलौते कमाने वाले शख्स की हजारों मील दूर सऊदी अरब में मौत हो गई और बदकिस्मती ऐसी की एक महीने बाद भी उसका शव परिवार को नहीं मिल सका है।
परिवार मदद के लिए हर किसी से गुहार लगा रहा है लेकिन सुनवाई करने वाला कोई नहीं। नतीजतन शव एक महीने से सऊदी अरब में अटका पड़ा है और परिजन यहां अपने गांव में। आइए अब आपको विस्तार से बताते हैं पूरा मामला।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार झारखंड के गिरीडीह जिले के बागादौर ब्लॉक के तिरला गांव के रहने वाले 42 साल के नुनुचंद महतो की बीते महीने सऊदी अरब में मौत हो गई थी।
वह वहां कुछ दिन पहले ही काम की तलाश में गए थे। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी उनका शव अभी तक अपने घर नहीं आ सका है। इसकी वजह है वो अजीब शर्त जो महतो को नौकरी देने वाले ठेकेदार ने उनके परिवार के सामने रख दी है।
ठेकेदार की मनमर्जी के कारण नहीं मिल रहा शव
ठेकेदार का कहना है कि वह शव तभी भेजेगा जब महतो का परिवार यह लिखकर दे दे की उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। वहीं परिवार का कहना है कि बिना यह जाने की उसकी मौत किस वजह से हुई है वह कैसे कुछ लिखकर दे दें।
परिवार के अनुसार महतो एक बिजली मैकेनिक थे जो बीते 6 जुलाई को नौकरी के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। उनकी नौकरी चेन्नई स्थित एक निजी फर्म ने सऊदी अरब में बिजली की लाइन बिछाने के लिए की थी।
फर्म को लार्सन एंड टर्बो कंपनी की ओर से यह ठेका मिला था। महतो के जीजा प्रकाश कुमार ने बताया कि उनके जाने के कुछ दिन बाद ही बीते 31 जुलाई को उन्हें सूचना मिली की महतो की तबियत खराब है।
अगले दिन ही उनके साथियों ने बताया कि उनकी मौत हो चुकी है और उनका शव तामरा पुलिस स्टेशन क्षेत्र में एक अस्पताल में रखा हुआ है। प्रकाश के अनुसार हमने इस संबंध में तहल महतो से संपर्क किया जिसके द्वारा नुनुचंद सऊदी अरब गए थे।
विदेश मंत्रालय से गुहार लगाने के बाद भी नहीं मिला कोई लाभ
उसने बताया कि नुनुचंद का शव केवल उसी स्थिति में मिल सकता है जब वह लिखकर दें दे कि उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। तहल महतो के अनुसार वह ऐसे कैसे लिखकर दे सकते हैं क्योंकि उन्हें इस संबंध में कोई कागज ही उपलब्ध नहीं करवाया गया है जिससे पता चले कि उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है।
हम चाहते हैं कि उनका नियोक्ता उनकी मौत का मुआवजा दे। लेकिन मजबूरी ये है कि हम गरीब लोग हैं और कुछ नहीं कर सकते। न हमारे पास सऊदी अरब जाने के लिए पासपोर्ट है न पैसे। आलम ये है कि गरीबी के कारण महतो की पत्नी अपने तीनों बच्चों के साथ अपने पिता के यहां रहने को मजबूर है।
दूसरी ओर बागोदार के भाजपा विधायक नगेन्द्र महतो कहते हैं कि वह इस संबंध में बीते छह अगस्त को विदेश मंत्रालय को खत लिखकर मदद की अपील कर चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने भी उन्हें इस संबंध में जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं हुई।
वहीं स्थानीय एसडीएम पवन कुमार मंडल ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले ही चार्ज संभाला है और वो इंतजार कर रहे हैं कि इस संबंध में कोई लिखित शिकायत आए तो वह कार्यवाही करे।