70 साल की देवंती देवी बीमार हैं और अपने गांव से 6 किमी दूर बैंक का तीन बार चक्कर लगा चुकी हैं। तीनों बार उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा क्योंकि हर बार उनके खाते में फूड सब्सिडी की राशि नहीं आई। देवंती अकेली महिला नहीं हैं जो बैंक से खाली हाथ लौटी हैं। ऐसे कई चेहरे हैं जो बैंक आकर यह सुनकर वापस चले जाते हैं कि 'आपके खाते में सरकार द्वारा कोई राशि ट्रांसफर नहीं की गई है।'
झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने राज्य की कमान संभालने के साथ ही फूड
सब्सिडी सीधे खातों में ट्रांसफर करने का पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। यह अपने आप में काफी बड़ा प्रोजेक्ट है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने अक्टूबर महीने में राजधानी रांची से 20 किमी दूर नागरी ब्लॉक को चुना। डीबीटी योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के खाते में सीधे फूड सब्सिडी राशि भेजी जाती है। जहां वह बाजार के दाम पर राशन खरीद सकते हैं।
इस प्रोजेक्ट में 12 हजार कार्डधारक और 52 हजार से ज्यादा लाभार्थी शामिल हैं। झारखंड से पहले भी इस प्रकार के डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के पायलट प्रोजेक्ट चलाए जा चुके हैं लेकिन इनमें कुछ एक हजार लोग ही शामिल थें।
डीबीटी सिस्टम के अंतर्गत लाभार्थियों को फूड सब्सिडी की राशि सीधे उनके खाते में भेज दी जाती है। जिससे वह सीधे राशन की दुकान से सामान खरीद सकते हैं। योजना के तहत लाभार्थी को 32 रुपये प्रति किलो के हिसाब से राशि दी जाती है।
क्या आ रही हैं परेशानियां
कुछ खातों में राशि आने पर मैसेज नहीं आते तो कहीं ऐसी शिकायतें भी हैं कि अंगूठा परिवार के किसी और सदस्य का लगा है और राशि परिवार के किसी और सदस्य के खाते में आती है। जानकारों का कहना है कि डीबीटी का पायलट प्रोजेक्ट सरकार के साथ-साथ नागरी के लोगों के लिए भी बोझ बन चुका है।