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10% से ज्यादा फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर 2.5 लाख तक जुर्माना, दूसरी बार में मान्यता रद्द

Wed, 06 Dec 2017 06:19 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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स्कूली शिक्षा में साल दर साल बढ़ते फीस की मार झेल रहे अभिभावकों के लिए अच्छी खबर है। अब झारखंड में बिना जिला उपायुक्त द्वारा गठित कमेटी की सहमति के स्कूल प्रबंधन 10 फीसदी से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकेगा। यही नहीं निर्धारित फीस से ज्यादा लेने पर स्कूल पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना भी लगेगा। कैबिनेट ने इससे संबधित विधेयक को मंजूर कर लिया है, जिसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। 
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झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन विधेयक  2017 को झारखंड सरकार की कैबिनेट मंत्रिमंडर द्वारा स्वीकृत कर लिया गया है। विधेयक ने प्रावधानों के मुताबिक फीस बढ़ाने का फैसला फीस निर्धारण समिति करेगी। स्कूलों में 10 फीसदी से ज्यादा फीस बढ़ाने पर उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला समिति का निर्णय अंतिम होगा। सरकार इस विधेयक को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश करेगी। 

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा तैयार विधेयक में स्कूलों में फीस निर्धारित करने के लिए एक समिति के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके तहत हर स्कूल में  एक फीस समिति होगी, जिसमें अध्यक्ष समेत नौ सदस्य होंगे। निजी विद्यालय प्रबंधन द्वारा मनोनीत व्यक्ति समिति का अध्यक्ष होगा। 
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तय फीस तीन शैक्षणिक सत्र के लिए मान्य होगी
फीस में 10 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी होने पर इसे जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति के पास भेजा जाएगा। जिला स्तरीय समिति मामले की जांच के बाद फीस बढ़ोतरी पर फैसला करेगी, जो तीन शैक्षणिक सत्र के लिए मान्य होगी। 

अपील कर सकता है स्कूल प्रबंधन 
जिला स्तरीय समिति के फैसले से असंतुष्ट होने पर स्कूल प्रबंधन राज्य शिक्षा न्यायाधिकरण में अपील कर सकेगा। निर्धारित फीस से ज्यादा फीस वसूलने पर पहली बार स्कूल पर ढाई लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। दूसरी बार ऐसा करने पर जुर्माने के साथ ही स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। 

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार फीस निर्धारण के लिए गठित समिति में स्कूल के प्रिंसिपल समिति के सदस्य सचिव होंगे। स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा तीन शिक्षकों को समिति के सदस्य के रूप में मनोनीत किया जाएगा। शिक्षक संघ द्वारा नामित चार माता-पिता फीस निर्धारण समिति के सदस्य होंगे। समिति का कार्यकाल तीन  शैक्षणिक सत्र के लिए होगा। स्कूल प्रबंध समिति एक सप्ताह पहले फीस  निर्धारण से संबंधित एजेंडा उपलब्ध कराएगी। इसके बाद फीस निर्धारण समिति स्कूल की स्थिति, बेहतर शिक्षा के लिए संरचना, प्रशासन और रख-रखाव पर खर्च,  शिक्षकों और कर्मचारियों की सेलरी, सालाना वेतन वृद्धि जैसे बिंदुओं पर विचार करते हुए फीस तय करेगी। 
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