बता दें कि राज्य सरकार कोरोना काल के बाद पहला बजट पेश किया। ऐसे में आम जनता की नजर इस बजट पर टिकी थीं। लोगों को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार से उम्मीद थी। वहीं, कारोबारी निर्माण सेक्टर में सिंगल विंडो क्लीयरेंस, एमएसएमई के लिए मदद, खनन उद्योग से जुड़ी घोषणाओं, इज ऑफ डूइंग बिजनेस और आत्मनिर्भर भारत के दिशा में घोषणाओं का इंतजार कर रहे थे।
वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने बजट पेश किया। उन्होंने बताया कि मनरेगा मजदूरी में 31 रुपये का इजाफा किया जाएगा। वहीं, कृषि क्षेत्र को बढ़ावा के लिए 18 हजार 653 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का मकसद ग्रामीण जीवन में समृद्धि लाना है।
वित्त मंत्री ने बताया कि झारखंड कृषि ऋण माफी योजना शुरू की जाएगी। इसके लिए 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पिछले साल से इस बार का बजट 4900 करोड़ रुपये ज्यादा है। वहीं, सिंचाई के लिए 45.83 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बजट में मछुआरों को अनुदान पर नाव मिलने का प्रावधान किया गया है। वहीं, राज्य को अपने कर राजस्व से 23 हजार 265.42 करोड़, गैर कर राजस्व से 13500 करोड़, केंद्रीय सहायता से 17891.48 करोड़, केंद्रीकरण में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में 22050.10 करोड़, लोक ऋण से 14500 करोड़ एवं उधार तथा अग्रिम की वसूली से करीब 70 करोड़ प्राप्त होने का अनुमान है।