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Jharkhand: झारखंड विधानसभा ने पारित किया नया अधिवास विधेयक, राज्यपाल के संशोधन को फिर किया गया दरकिनार

Thu, 21 Dec 2023 02:01 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

आलमगीर आलम ने झारखंड में स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा और ऐसे स्थानीय व्यक्तियों को परिणामी, सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य लाभ देने संबंधी विधेयक 2022 पेश किया। 
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झारखंड विधानसभा - फोटो : Social Media
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विस्तार
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झारखंड विधानसभा ने बुधवार को राज्यपाल द्वारा मांगे गए किसी भी संशोधन के बिना, एक बार फिर एक विधेयक पारित किया गया। इसमें लोगों की अधिवास स्थिति निर्धारित करने के लिए 1932 के भूमि रिकॉर्ड का उपयोग करने का प्रस्ताव है।

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हाल ही में राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन ने ध्वनि मत से पारित विधेयक को देश के अटॉर्नी जनरल की कानूनी और संवैधानिक राय के अनुसार पुनर्विचार के लिए कुछ सुझावों के साथ लौटा दिया था।

आलमगीर आलम ने झारखंड में स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा और ऐसे स्थानीय व्यक्तियों को परिणामी, सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य लाभ देने संबंधी विधेयक 2022 पेश किया। विधेयक के अनुसार, जिन लोगों के पूर्वज 1932 के खतियान (भूमि रिकॉर्ड) में दर्ज थे। उन्हें झारखंड का स्थानीय निवासी माना जाएगा, और उन्हें राज्य सरकार के वर्ग 3 और वर्ग 4 के पदों पर नियुक्तियों के लिए माना जाएगा।
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ध्वनि मत से पारित कर राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा था मत
11 नवंबर 2022 को विशेष सत्र में हेमंत सोरेन सरकार ने इस बिल को ध्वनि मत से पारित कर राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा था। लेकिन, राज्यपाल ने जनवरी में इसे सरकार को लौटा दिया था। राधाकृष्णन ने उल्लेख किया था कि विधेयक का एक खंड संविधान के कुछ अनुच्छेदों का उल्लंघन कर सकता है, और इस प्रकार अमान्य हो सकता है।

सोरेन ने कहा खतियान आधारित स्थानीय नीति राज्य के करोड़ों आदिवासियों और मूलवासियों की पहचान से जुड़ी है और यह उनकी लंबे समय से प्रतीक्षित मांग रही है। इस बीच, भाजपा विधायकों ने विधेयक को राजनीति से प्रेरित स्टंट करार देते हुए कहा कि इससे कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

बिना विचार किए पेश किया विधेयक
जिस तरह से विधेयक को दोबारा सदन में पेश किया गया और पारित किया गया, उससे ऐसा लगता है कि सरकार युवाओं को नौकरी और राज्य के लोगों को न्याय देने की इच्छुक नहीं है। विपक्ष के नेता अमर बाउरी ने कहा, 'राज्यपाल द्वारा सुझाए गए बिंदुओं पर विचार किए बिना इसे पेश किया गया।'

इसके अलावा, तीन अन्य विधेयक भी सदन में पेश किये गये, जिसमें एक संशोधन विधेयक भी शामिल है जो झारखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनों में भाग लेने वाले लोगों के आश्रितों को सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है।
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