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झारखंड: एचपीवी टीकाकरण पर पहले होगा गहन अध्ययन, सर्वे और विशेषज्ञों की राय के बाद ही फैसला लेंगे हेमंत सोरेन

Wed, 04 Nov 2026 10:24 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड में एचपीवी टीकाकरण लागू करने से पहले सरकार व्यापक सर्वेक्षण और विशेषज्ञों से परामर्श करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रिम्स, मेडिकल कॉलेजों, स्वास्थ्य बीमा योजनाओं, सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग और सरकारी अस्पतालों की एम्बुलेंस व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।

 

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हेमंत सोरेन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा बैठक हुई। बैठक में किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए प्रस्तावित ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण, रिम्स में चिकित्सा शिक्षा एवं विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था, स्वास्थ्य बीमा योजनाओं और सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाओं सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

एचपीवी टीकाकरण पर अध्ययन के बाद ही होगा फैसला

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बैठक में राज्य की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रस्तावित एचपीवी टीकाकरण के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि झारखंड में सर्वाइकल कैंसर के मामलों का अनुमानित आंकड़ा प्रति एक लाख आबादी पर 13 है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य की बेटियों और महिलाओं का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। इसकी रोकथाम और बचाव के लिए सरकार पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ आवश्यक कदम उठाएगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि एचपीवी टीकाकरण की दिशा में आगे बढ़ने से पहले इस विषय पर व्यापक और गहन अध्ययन किया जाए। इसके लिए पूरे राज्य में सर्वेक्षण कराकर सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या, आयु वर्ग, बीमारी के विभिन्न चरणों और सक्रिय मामलों का विस्तृत आंकड़ा जुटाया जाए। इसके आधार पर समग्र रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया।

मुख्यमंत्री ने इस विषय पर विशेषज्ञ समिति गठित करने और देश-विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के निदेशकों, कैंसर विशेषज्ञों तथा संबंधित विषय के जानकारों से परामर्श लेने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि एचपीवी टीकाकरण के वैज्ञानिक, तकनीकी, चिकित्सकीय और सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं का गहन मूल्यांकन किया जाए। सभी तथ्यों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही इसके क्रियान्वयन को लेकर निर्णय लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील विषयों पर सरकार गंभीरता, सतर्कता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को यह भी निर्देश दिया कि इस विषय को लेकर समाज में किसी तरह की अफवाह या भ्रांति न फैले। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को प्रमाणिक और सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग व्यवस्था होगी मजबूत
मुख्यमंत्री ने सर्वाइकल कैंसर की समय रहते पहचान और रोकथाम के लिए नियमित स्क्रीनिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में पैप स्मीयर टेस्ट तथा एचपीवी डीएनए टेस्ट जैसी आवश्यक जांच सुविधाओं की उपलब्धता और पहुंच बेहतर बनाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर जांच, जागरूकता और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग प्रभावी और समन्वित कार्ययोजना तैयार करे।

रिम्स में चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का होगा विस्तार

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बैठक में रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने रिम्स के अलग-अलग विभागों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, मरीजों को मिल रहे उपचार, ओपीडी व्यवस्था, मेडिकल सीटों, छात्रावासों और अन्य आवश्यक सेवाओं की स्थिति की जानकारी ली।

इस दौरान रिम्स में मेडिकल शिक्षकों के स्वीकृत पदों के पुनर्गठन और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार, रिम्स में मेडिकल शिक्षकों के कुल 319 स्वीकृत पदों का पुनर्गठन किया जाना है। इसके तहत सात सुपर स्पेशियलिटी विभागों और तीन ब्रॉड स्पेशियलिटी विभागों के सृजन का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 16 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव भी रखा गया।

प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत प्राध्यापक के वर्तमान 44 पदों के स्थान पर 42 पद, अपर प्राध्यापक के नौ पदों के स्थान पर आठ पद, सह-प्राध्यापक के 95 पदों के स्थान पर 96 पद और सहायक प्राध्यापक के 170 पदों के स्थान पर 172 पद प्रस्तावित हैं। वहीं, सहायक प्राध्यापक-सह-सांख्यिकी के एक पद में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है। इस तरह पुनर्गठन के बाद भी मेडिकल शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 319 ही रहेगी।

प्रस्तावित पुनर्गठन का उद्देश्य रिम्स में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना, सुपर स्पेशियलिटी और ब्रॉड स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं का विस्तार करना तथा योग्य मेडिकल शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इससे संस्थान की शैक्षणिक और चिकित्सकीय क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने रिम्स की समग्र व्यवस्था बेहतर बनाने पर जोर देते हुए कहा कि राज्य के इस महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान में मरीजों को बेहतर उपचार और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा मिलनी चाहिए।

हजारीबाग, दुमका और पलामू मेडिकल कॉलेजों की भी समीक्षा
बैठक में रिम्स के अलावा हजारीबाग, दुमका और पलामू स्थित मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इन संस्थानों में उपलब्ध आधारभूत संरचना, मेडिकल शिक्षकों की संख्या, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने राज्य में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए समन्वित प्रयास करने पर जोर दिया।

अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लाभ पर चर्चा
बैठक में राज्यवासियों को सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ उपलब्ध कराने के विषय पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के प्रावधानों और आयुष्मान भारत योजना के साथ इसके समन्वय पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों तक इन योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचे और जरूरतमंद लोगों को उपचार के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाएं बेहतर बनाने पर जोर
बैठक में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति और उनके प्रभावी संचालन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एम्बुलेंस व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए आधारभूत संरचना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, चिकित्सा शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ काम करें तथा आम लोगों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी पहल सुनिश्चित करें।

बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, विशेष सचिव नेहा अरोड़ा, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के निदेशक और भवन निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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