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माओवादी कमांडर सचिन का सरेंडर: सांसद हत्याकांड के बाद दो दशक से था सुरक्षाबलों की रडार पर

Thu, 10 Sep 2026 10:10 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला जमशेदपुर/रांची

सार

जमशेदपुर के पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड के मुख्य आरोपी और भाकपा (माओवादी) के रीजनल कमेटी सदस्य रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन ने अपनी पत्नी मीता के साथ कोलकाता में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों पर कुल 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
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माओवाद (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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जमशेदपुर में भाकपा (माओवादी) के रीजनल कमेटी सदस्य और एरिया कमांडर रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन ने अपनी इनामी पत्नी मीता के साथ कोलकाता में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। जमशेदपुर के पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड का मुख्य आरोपी रामप्रसाद मार्डी विगत दो दशक से सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बना हुआ था।
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झारखंड सरकार ने सचिन पर 15 लाख रुपये और उसकी पत्नी मीता पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। इस आत्मसमर्पण को झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमांत क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों के अंत की ओर महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 सांसद हत्याकांड का मुख्य आरोपी
पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला स्थित बागुड़िया में 4 मार्च, 2007 को एक फुटबॉल मैच के दौरान माओवादियों ने जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद सुनील महतो की गोली मारकर हत्या कर दी थी। रामप्रसाद मार्डी इस नृशंस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और झारखंड पुलिस को वर्षों से उसकी गहन तलाश थी। माओवादी संगठन में सचिन को 1 करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष कमांडर असीम मंडल उर्फ आकाश के दस्ते का सबसे भरोसायोग्य रणनीतिकार तथा हथियारों का मुख्य संचालक माना जाता था।
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सीमावर्ती इलाकों में फैला नेटवर्क
रामप्रसाद मार्डी का प्रभाव क्षेत्र पूर्वी सिंहभूम के पटमदा, बोड़ाम और एमजीएम से लेकर पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम तथा पुरुलिया जिलों तक फैला हुआ था। इन इलाकों में उसके विरुद्ध दर्जनों उग्रवादी वारदात, जबरन लेवी वसूली और सुरक्षाबलों पर जानलेवा हमलों के कई संगीन मामले दर्ज हैं। हाल के महीनों में सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों में सुरक्षाबलों द्वारा चलाई गई सख्त घेराबंदी के बाद सचिन अपने दस्ते के साथ दालमा तथा अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में शरण लेने की फिराक में लगा हुआ था।

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 संयुक्त कार्रवाई से टूटा संगठन
झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल ने सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर संयुक्त अभियान चलाकर माओवादियों का रसद तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार 1 करोड़ रुपये के इनामी कमांडर के सबसे मजबूत स्तंभ का संगठन से अलग होना इस इलाके से नक्सली गतिविधियों के सफाये का संकेत है।
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