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Jharkhand : हाईकोर्ट ने CM सोरेन के खिलाफ खनन पट्टा मामले की जांच पर मांगी रिपोर्ट, सरकार और ईडी को निर्देश

Tue, 04 Apr 2023 03:45 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, रांची।

सार

मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आनंद सेन की खंडपीठ ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता सुनील कुमार महतो द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और ईडी को स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। - फोटो : ANI
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विस्तार
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झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ खनन पट्टा मामले में की गई जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश करने का सोमवार को निर्देश दिया। पट्टा मुख्यमंत्री के पक्ष में उनकी व्यक्तिगत हैसियत से प्रदान किया गया था, जबकि उनके पास खान विभाग का प्रभार था।

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मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आनंद सेन की खंडपीठ ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता सुनील कुमार महतो द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और ईडी को स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई एक मई को होगी। महतो ने अपनी याचिका में कहा है कि सोरेन का अपने पक्ष में लीज में ली गई खदान जनप्रतिनिधियों के लिए लाभ का पद नहीं रखने के नियम का सीधा उल्लंघन है।

महाधिवक्ता राजीव रंजन ने राज्य सरकार का बचाव करते हुए कहा कि जनहित याचिका बिना गंभीरता के दायर की गई है और राजनीति से प्रेरित है। इससे पहले भी हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की गई थी, जिसमें मामले की जांच के आदेश दिए गए थे। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
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महाधिवक्ता के बयानों पर पलटवार करते हुए महतो के वकील ने कहा कि पहले का मामला शिव शंकर शर्मा नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर किया गया था, जो शायद सोरेन परिवार के प्रति व्यक्तिगत द्वेष रखते थे। वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सामने शर्मा की विश्वसनीयता भी स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुई थी।

बता दें कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने सोरेन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने रांची के अंगारा ब्लॉक में 0.88 एकड़ में फैली एक पत्थर की खदान के लिए मई 2021 में उनके द्वारा आयोजित एक कंपनी को खनन पट्टा आवंटित किया था। सोरेन ने कहा था कि खनन पट्टा पहले भी उन्हें दिया गया था और इसकी अवधि समाप्त होने पर उन्होंने इसके लिए दोबारा आवेदन किया था।

लोकतंत्र खतरे में; केंद्र की 'फूट डालो और राज करो' की नीति चिंता का विषय:  हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने केंद्र की कथित "फूट डालो और राज करो" की नीति पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की गलत नीतियों के कारण लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था दोनों ही चरमराने के कगार पर हैं।

द्रमुक प्रायोजित ऑल इंडिया फेडरेशन फॉर सोशल जस्टिस के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि विपक्षी एकता एसटी-एससी, अल्पसंख्यकों, ओबीसी और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है। सोरेन ने कहा कि देश को आजादी के 75 साल पूरे हो गए हैं और हमें अभी भी सामाजिक न्याय की चिंता है। ऐसे समय में जिसे अमृत काल और विश्व गुरु कहा जा रहा है, हम सामाजिक न्याय की मांग कर रहे हैं। ...वर्तमान में देश का लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे और बैंक जैसी संस्थाओं को निजी हाथों में दिया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने चतुराई से ओबीसी आरक्षण को कम करने का काम किया था। उन्होंने कहा, राज्य में हमारी सरकार बनते ही हमने आरक्षण नियमों में कुछ बदलाव किए और ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत कर दिया। इतना ही नहीं हमने इसे नौवीं अनुसूची में जोड़ने के लिए केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा था, लेकिन उस प्रस्ताव को झारखंड के तत्कालीन राज्यपाल ने वापस कर दिया था।

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