गिरिडीह माओवादी हमले की जांच में अफसरों को नहीं प्रशासन की व्यवस्था को दोषी ठहराया गया है। इस मामले में जिले के सभी अफसरों को क्लीन चिट दे दी गई है। मामले की जांच में पता चला है कि इस नक्सली हमले की आशंका स्पेशल ब्रांच ने पहले ही जता दी थी और पुलिस अधिकारियों को ई-मेल भेजकर सूचित कर दिया गया था। लेकिन वो ई-मेल किसी ने न पढ़ पाने के कारण व्यवस्था को दोषी ठहराया गया है।
बोकारो आईजी मुरारी लाल मीणा ने मामले की जांच के बाद सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है। हालांकि रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र के अनुसार इसमें पुलिस व्यवस्था को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट में किसी पुलिस अधिकारी को दोषी न ठहराते हुए कहा गया है कि पुलिस व्यवस्था में खामी के चलते हार्डकोर नक्सली चिरागजी के दस्ते को कैदी वाहन पर हमला कर नक्सलियों को छुड़ाने में सफलता मिली।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गिरिडीह के एसपी की तकनीकी शाखा ने विशेष शाखा की ओर से भेजे गये ई-मेल को खोला ही नहीं था। ऐसे में विशेष शाखा की ओर से पहले ही भेजी गयी सूचना की जानकारी ही नहीं मिल सकी।
मालूम हो की नौ नवंबर को 32 कैदियों से भरे वाहन पर नक्सलियों ने गिरिडीह-धनबाद मार्ग पर हमला कर आठ साथियों को छुड़ा लिया था। घटना से छह दिन पहले ही स्पेशल ब्रांच ने इस नक्सली हमले की आशंका जताते हुए गिरिडीह एसपी सहित पुलिस के बड़े अधिकारियों को ई-मेल किया था। इसमें घटना की संभावित तिथि व स्थान का भी जिक्र किया गया था। पर इस ई-मेल को किसी ने खोला ही नहीं।