पूर्व मध्य रेलवे ने गया-धनबाद रेल मार्ग पर रेल परिचालन की क्षमता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे ने चिरैलापोथु-पहाड़पुर और कोडरमा-प्रधानखंता के बीच लगभग 242 किलोमीटर लंबे रेलखंड में तीसरी और चौथी रेल लाइन से जुड़े सिग्नलिंग तथा टेलीकम्युनिकेशन कार्य के लिए करीब 340.16 करोड़ रुपये का ईपीसी टेंडर जारी किया है। इस परियोजना के अंतर्गत आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था और ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग विकसित की जाएगी। रेलवे ने इस संपूर्ण निर्माण कार्य को 24 महीने की निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
अतिरिक्त ट्रैक क्षमता मिलेगी
ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग की कार्यप्रणाली
परियोजना के तहत ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग आधुनिक और सुरक्षित प्रणाली है। इस व्यवस्था में रेलवे ट्रैक को छोटे-छोटे ब्लॉक सेक्शन में बांटा जाता है। जब कोई ट्रेन किसी ब्लॉक सेक्शन में प्रवेश करती है, तो सिग्नलिंग सिस्टम उस हिस्से को तुरंत व्यस्त मान लेता है। इसके बाद पीछे से आने वाली अगली ट्रेन के लिए सिग्नल की स्थिति उसी आधार पर नियंत्रित होती है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य एक ही दिशा में आगे बढ़ रही ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखना है, ताकि उपलब्ध ट्रैक क्षमता का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सके।
परिचालन क्षमता और अतिरिक्त ट्रेनें
अतिरिक्त लाइनों और आधुनिक सिग्नलिंग के संयुक्त प्रभाव से इस रेलखंड पर भविष्य में बढ़ने वाले यातायात दबाव को आसानी से संभाला जा सकेगा। परियोजना पूरी होने के बाद रेल टाइमटेबल में नई ट्रेनें जोड़ने अथवा मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने का अवसर उपलब्ध होगा। हालांकि, केवल परियोजना पूरी होने मात्र से नई ट्रेनों का संचालन स्वतः आरंभ नहीं होगा। नई यात्री ट्रेनें चलाने या फेरे बढ़ाने का अंतिम निर्णय रेलवे प्रशासन परिचालन आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और अंतिम टाइमटेबल के आधार पर ही करेगा।