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Jharkhand: रांची और खूंटी में हाथियों का कहर, ग्रामीणों में दहशत, उठाई ये बड़ी मांग

Fri, 05 Sep 2025 12:08 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

रांची जिले के चान्हो प्रखंड और खूंटी जिले के रानियां प्रखंड में हाथियों का आतंक बढ़ गया है। होंदपिडी गांव में 17 हाथियों के झुंड ने देर रात तीन घरों को ध्वस्त कर दिया और अनाज समेत जरूरी सामान नष्ट कर दिया।
 
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मौके पर मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी रांची से सटे खूंटी जिले के रानियां प्रखंड और रांची जिले के चान्हो प्रखंड में इन दिनों हाथियों का आतंक चरम पर है। कभी फसलें रौंद रहे हैं तो कभी घरों को ध्वस्त कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण रातभर जागकर अपनी सुरक्षा करने को मजबूर हो गए हैं। खूंटी जिले के रानियां प्रखंड के कई गांवों में हाथियों और बंदरों का उत्पात लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई परिवार पलायन को मजबूर हो गए हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर ग्रामीण 10 सितंबर को रनिया बाजार टांड़ में एक विशाल जनसभा करेंगे। इसकी अगुवाई जिप अध्यक्ष मसीह गुड़िया करेंगे।  ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग मुआवजा देने में देरी करता है जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। गांवों में अब तक कई लोग हाथियों के हमले में अपनी जान गंवा चुके हैं और दर्जनों परिवार फसल व घरों के नुकसान की भरपाई का इंतजार कर रहे हैं।
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चान्हो प्रखंड में तबाही

गुरुवार रात रांची जिले के चान्हो प्रखंड के होंदपिडी गांव में करीब 17 हाथियों का झुंड घुस आया। हाथियों ने धर्मेश उरांव, सीता उरांव और हारना उरांव समेत तीन गरीब परिवारों के घर ध्वस्त कर दिए। अंदर रखा चावल, गेहूं, धान और अन्य जरूरी सामान भी नष्ट कर दिया। अचानक हुए इस हमले से पूरे गांव में अफरातफरी मच गई और ग्रामीण दहशत में हैं।

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ग्रामीणों ने उठाई ये मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत और स्थायी समाधान की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि गांवों में सोलर हाई मास्ट लाइटें लगाई जाएं ताकि हाथियों को रोका जा सके। साथ ही प्रभावित परिवारों को मुआवजा जल्द मिले। वन विभाग के अनुसार हाथियों द्वारा जान-माल की क्षति पर मुआवजा देने का प्रावधान है, लेकिन यह तभी मिलता है जब विभागीय कर्मी मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करते हैं। लगातार बढ़ रही घटनाएं यह साफ करती हैं कि मानव-हाथी संघर्ष गंभीर रूप ले चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी वक्त बड़ी जनहानि हो सकती है।
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