झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड के बंटवारे को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूरी दे दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुये यह फैसला सुनाया। जस्टिस पी सतशिवम व जस्टिस जगदीश सिंह केहर की खंडपीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की।
फैसला सुनाते हुये खंडपीठ ने कहा कि दोनों पक्ष विद्युत अधिनियम-03 की धारा 131 से 134 का अनुपालन करेंगे। ऐसा नहीं होने पर याचिकाकर्ता सक्षम फोरम में इसे चुनौती दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड अभियंता, पदाधिकारी, कर्मचारी समन्वय समिति व प्रतिवादी राज्य सरकार की दलील सुनने के बाद फैसला सुनाया।
विद्युत बोर्ड के बंटवारे को लेकर अवरोध पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विराम लग गया है। बोर्ड को लगातार हो रहे घाटे को कम करने व उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने के लिए राज्य विद्युत बोर्ड का बंटवारा किया जाना है। तत्कालीन ऊर्जा सचिव संतोष सत्पथी ने बंटवारा न करने को आपराधिक कृत्य बताया था। वहीं 17 मई 2011 को झारखंड हाइकोर्ट ने बंटवारा न होने पर हैरानी जताई थी।
अब विद्युत अधिनियम-03 के तहत झारखंड विद्युत बोर्ड का बंटवारा होगा। अधिनियम के अनुसार बिजली बोर्ड को चार भागों में बांट कर अलग-अलग कंपनी बनाने की अनिवार्यता रखी गयी है। झारखंड में यह बंटवार 28 बार टाला जा चुका है। बिहार सहित 18 राज्यों में बिजली बोर्ड का बंटवारा पहले ही हो चुका है।