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Dhanbad Judge Murder: जज की हत्या के मामले में कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- ऐसा आदमी जीवन भर सलाखों के पीछे रहे

Sat, 13 Aug 2022 06:54 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धनबाद

सार

न्यायाधीश रजनी कांत पाठक ने कहा कि कोई सोच भी नहीं सकता कि झारखंड कोर्ट के एक जज की इस तरह से हत्या कर दी जाएगी। इस घटना ने न केवल देश की पूरी न्यायिक बिरादरी को बल्कि बड़े पैमाने पर लोगों को झकझोर कर रख दिया। 
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धनबाद कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सीबीआई की विशेष अदालत ने पिछले साल धनबाद कोर्ट के जज की हत्या के सिलसिले में एक ऑटो चालक और उसके साथी मौत तक कारावास की सजा सुनाई। विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे अपराधी को उसके जीवन के अंत तक सलाकों के पीछे रखने की जरूरत है। 
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28 जुलाई को हुई थी हत्या
विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश रजनी कांत पाठक ने ऑटोचालक लखन शर्मा और उसके सहयोगी राहुल वर्मा को 49 वर्षीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की 28 जुलाई को हुई हत्या का दोषी ठहराया। 
 
विशेष सीबीआई अदालत ने की सख्त टिप्पणी
न्यायाधीश रजनी कांत पाठक ने कहा कि कोई सोच भी नहीं सकता कि झारखंड कोर्ट के एक जज की इस तरह से हत्या कर दी जाएगी। इस घटना ने न केवल देश की पूरी न्यायिक बिरादरी को बल्कि बड़े पैमाने पर लोगों को झकझोर कर रख दिया। 
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सुबह टहल रहे थे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश
धनबाद कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद को पिछले साल 28 जुलाई को जिला अदालत के पास रणधीर वर्मा चौक पर एक भारी ऑटो रिक्शा ने टक्कर मार दी थी। वह सुबह लगभग पांच बजे टहल रहे थे। उसी दिन उनकी मृत्यु हो गई थी। 

सीबीआई की विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की घटना के बाद न्यायिक अधिकारियों के परिवार के सदस्यों और लोगों के बीच डर का माहौल था, जो यह सोचने को मजबूर थे कि जब एक न्यायाधीश के साथ ऐसा हो सकता है तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं। 

न्यायाधीश रजनी कांत पाठक ने कहा, हत्या के लिए केवल दो सजा के प्रावधान हैं, एक आजीवन कारावास और दूसरा फांसी (मृत्युदंड)। शीर्ष अदालत के फैसलों के अनुसार यह मामला दुर्लभ से दुर्लभतम के दायरे में नहीं आता है। मेरी राय में यदि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी जाती है तो उन्हें जेल मैनुअल के मुताबिक 14 साल या उसके बाद हिरासत से रिहा किया जा सकता है। 

इसलिए आदेश में कहा गया है, "इस अदालत के दिमाग में इस तरह के अपराधी को अपने जीवन के अंत तक सलाकों के पीछे रखने की जरूरत है। अगर रिहा किया जाता है तो यह समाज को विशेष रूप से इस तरह की घटना को देखने वाले लोगों के लिए एक गलत मैसेज भेजेगा। साथ ही वह मानव जीवन और देश के कानून के सम्मान की परवाह किए बिना वहीं अपराध फिर कर सकता है। "
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