झारखंड के सरायकेला मॉब लिंचिंग मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 12 लोगों को चार साल कैद की सजा सुनाई है। इन्होंने एक पुलिस टीम पर हमला किया था जब वह चार लोगों को उग्र भीड़ से बचाने की कोशिश कर रही थी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश आशीष सक्सेना ने सोमवार को इन 12 आरोपियों को सजा सुनाई है।
सरकारी अधिकारियों पर ड्यूटी के वक्त हथियारों से हमला करने और शांति बाधित करने के आरोप में प्रत्येक आरोपी पर 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं सबूतों की कमी के कारण तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया। राज्य सरकार ने आरोपियों पर जल्द कार्रवाई के लिए मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंप दिया था।
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी उस भीड़ का हिस्सा थे जो चार लोगों को बच्चा चोर समझकर उनके साथ मारपीट कर रहे थे। यह घटना 18 मई 2017 को हुई थी। भीड़ ने पुलिस के वाहनों में भी आग लगा दी थी।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के केंद्र को मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून तैयार करने के लिए कहने के एक दिन पहले आया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने केंद्र से कहा, 'कोई भी नागरिक कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता है और न ही स्वयं कानून बना सकता है। यह राज्यों का कर्तव्य है कि वह कानून और व्यवस्था को सुनिश्चित करें। ताकि धर्मनिरपेक्षता की रक्षा हो और भीड़ तंत्र को रोका जा सके।'