सफेद मूंछे। ढलती उम्र, लेकिन जज्बा इतना कि लोग दाद दे रहे हैं। यहां 60 सिपाहियों को इन दिनों कमांडो की ट्रेनिंग दी जा रही है।
भले ही दौड़ के बाद कई मिनटों का हांफना जारी है लेकिन ये सिपाही 12 किलोमीटर की लंबी दौड़ में हिस्सा ले रहे हैं। तीन घंटे की कड़ी ट्रेनिंग लेने के बाद इनके शरीर में दम-खम नहीं बचता है।
इसके बावजूद देर शाम तक डयूटी कर पुन: अगले दिन ट्रेनिंग ग्राउंड में जुट जाते हैं। इसमें पहले चरण में प्रथम चरण में 60 पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसकी उम्र सीमा 55 वर्ष तय की गई है।
रांची जिला बल के सिपाहियों और हवलदारों को 24 दिन की कमांडों ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें जिले के थानों में पदस्थापित दो सिपाही और हवलदारों को बुलाया गया है।
पुलिस मैनुअल कहता है कि हर वर्ष सिपाही और हवलदारों को रिफ्रेशर ट्रेनिंग मिले। लेकिन कई सालों से ये सिलसिला रुका हुआ था। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार के आने के बाद इसकी पुन: व्यवस्था की गई है।
क्रैश कोर्स की तरह है यह ट्रेनिंग
ये रिफ्रेशर कोर्स है पुलिस महानिदेशक के आदेश पर प्रशिक्षण मिल रहा है। ये रिफ्रेशर कोर्स जैसा है। ताकि इनकी कार्य क्षमता बनी रहे। बाहर से आए ट्रेनर इन्हें ट्रेंड कर रहे हैं।