पिछले दिनों आई खबरों के अनुसार, नेपाल के कई स्कूलों में चीनी भाषा (मेंडरिन) को अनिवार्य कर दिया गया है। स्कूलों में पहले भी मेंडरिन भाषा सिखाई जाती थी। लेकिन अब छात्रों के लिए मेंडरिन भाषा सीखना अनिवार्य बना दिया गया है। हालांकि नेपाल सरकार ने कहा है कि स्कूलों के पास किसी विषय को अनिवार्य करने का अधिकार नहीं है।
रिपोर्टों के अनुसार चीन की सरकार ने एक प्रस्ताव दिया कि मेंडरिन के शिक्षकों की तनख्वाह काठमांडू स्थित चीनी दूतावास देगा। इसके बाद स्कूलों ने छात्रों के लिए मेंडरिन भाषा सीखना अनिवार्य कर दिया गया है। यह एक तरह से नेपाल में भाषा के जरिए चीन की धमक है।
वरिष्ठ टिप्पणीकार शशांक के अनुसार, काफी समय से नेपाल अपने देश में रोजगार सृजन के लिए कोई स्थायी उपाय की तलाश में है। चीन से करीब डेढ़ लाख यात्री हर वर्ष नेपाल पर्यटन के लिए आते हैं, लेकिन नेपाल इस आंकड़े को दस लाख के आसपास पहुंचाना चाहता है। इसके लिए जरूरी है कि नेपाल के लोगों को चीनी भाषा की ज्यादा जानकारी हो, जो चीन से आने वाले पर्यटकों के लिए गाइड का काम कर सकें।
शशांक का मानना है कि चीन नेपाल के साथ भारत के रिश्तों और हितों को नुकसान पहुंचाना चाहता है। नेपाल-भारत के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते हैं। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है, वहां के लोग भारत में बिना वीजा के आकर आराम से काम कर सकते हैं। तो चीन इन रिश्तों को प्रभावित करके वहां अपना दूरगामी हित साधना चाहता है।