स्थानीय दंतकथा के अनुसार, सबसे पहले कालीचरण नाम के गावंवाले ने लगभग 150 साल पहले यहां बेटी का वरदान मांगा था और उसकी इच्छा पूरी हो गई। जैसे ही लोगों को इसके बारे में पता चला बहुत से लोग बेटी की इच्छा से यहां पूजा-अर्चना करने के लिए आने लगे। एक ग्रामीण ने कहा, 'हर साल यहां बहुत से जोड़े बेटी मांगने के लिए आते हैं। बहुत से लोगों की इच्छा देवी पूरी करती हैं और सभी गांववाले पूरी भक्ति और श्रद्धा से माता की पूजा करते हैं।'
हालांकि यहां की दुर्गा पूजा पर महामारी का प्रभाव पड़ा है। एक भक्त ने कहा, 'हमारा एक बेटा है लेकिन हमें लगा कि बेटी के बिना परिवार अधूरा है। यहां पूजा करने और माथा टेककर, नाग रगड़ी इसके कुछ साल बाद ही हमारे घर बेटी का जन्म हुआ है। मेरा परिवार हर साल दुर्गा पूजा के समय मंदिर आता है ताकि देवी का आभार प्रकट किया जा सके।'
गांव की एक अन्य निवासी ने कहा, ‘माता की कृपा से बेटी मिलने के बाद मैंने उसका नाम भवानी रखा है। मेरी तरह बहुत से लोग, यहां तक की गर्भवती महिलाएं जिन्हें बेटी चाहिए वो यहां आकर माता का आशीर्वाद लेती हैं। मैं अपनी बेटी को सौभाग्यशाली मानती हूं।’