पूरे झारखंड में ब्लैकआउट की स्थिति बनी हुई है। रांची और जमेशदपुर में विद्युत व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में विद्युत विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने पूरे राज्य की बिजली काट दी है। इससे पूरे राज्य में तबाही मच गई है और व्यवस्था चरमरा गई है।
अस्पतालों में बिजली न होने के कारण इलाज संभव नहीं हो पा रहा व लोगों को पानी भी नहीं मिल रहा है। राजधानी रांची और औद्योगिक राजधानी जमशेदपुर सहित राज्य के लगभग सभी इलाकों में अंधेरा छाया हुआ है। पानी की सप्लाइ बंद हो गयी है। कुछ वीआइपी इलाकों और विद्युतकर्मियों की कालोनियों को छोड़कर हर जगह बिजली नहीं है।
विद्युत कर्मचारी पहले ही निजीकरण के संबंध में आपत्ति जता रहे थे। तब बिजली विभाग के बड़े अधिकारियों और सरकार ने विकल्प होने और परेशानी न होने की बात कही थी। लेकिन अभी कुछ ऐसा होता नजर नहीं आ रहा और नुकसान जनता को भुगतना पड़ रहा है।
बिजली न होने के चलते वॉमर्र बंद हो जाने से धनबाद स्थित पीएमसीएच में सात दिन की बच्ची की मौत हो गई। जुगसलाई स्वास्थ्य केंद्र में गुरूवार सुबह टॉर्च की रोशनी में महिलाओं की डिलवरी की गई। कई अस्पतालों में ऑपरेशन टालने पड़े। बिजली के अभाव में उद्योगों को भी नुकसान उठाना पड़ा। बड़े उद्योगों में काम तो हुआ लेकिन छोटे उद्योग पूरी तरह बंद हो गए। धनबाद जिले के छोटे-बड़े 395 उद्योगों का कारोबार प्रभावित रहा। लगभग 100 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है।
हड़तालियों पर होगी सख्त कार्रवाई
डीसी प्रशांत कुमार ने कहा है हड़ताली बिजली कर्मियों को जरूरत पड़ी तो एस्मा के तहत जेल भेजा जायेगा। उन्होंने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए डीवीसी, पॉलिटेक्निक और आईटीआई से कर्मी मंगाये गये हैं। इसके अलावा बिजली विभाग में काम करे रहे कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों की सहायता भी ली जा रही है। उन्होंने लोगों से संयम रखने की अपील की है।
जगह-जगह हंगामा
हड़ताल से गुस्साये लोगों ने हंगामा खड़ा कर राज्य के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन किये। लोगों की भीड़ ने डीआरएम चौक से हीरापुर हटिया मोड़ रोड तक की सड़क को जाम कर दिया। जमेशदपुर में रेलवे ट्रैक जाम किया। मेदिनीनगर में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला। बिजली विभाग में तोड़फोड़ की।