हमारे देश में एक तरफ जहां नेताओं द्वारा विकास की बात कही जाती है, कई क्षेत्रों में उस काम के लिए योजनाएं भी शुरू की जाती हैं जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य आदि कारकों को रखा जाता है। वहीं दूसरी तरफ कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां आज भी लोगों को दो वक्त की रोटी तक नसीब नहीं होती। बीते कई महीनों से भूख के कारण मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। कहीं आधार कार्ड लिंक ना होना कारण बनता है तो कहीं अधिकारियों की लापरवाही। अब ऐसे ही मामले झारखंड से भी सामने आ रहे हैं। इसी महीने राज्य में भूख से तीन मौतें हो चुकी हैं।
तीसरा मामला बुधवार का है। जिसमें रामगढ़ जिले में कथित तौर पर भूख के कारण विलुप्तप्राय बिरहोर आदिवासी समुदाय के एक शख्स की मौत हो गई। इस पर राज्य सरकार ने एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि मौत का कारण भूख नहीं है। मृतक का नाम चिंतामणि मल्हार है। मृतक के बेटे विदेशी मल्हार का कहना है कि कई दिनों से घर में खाने के लिए कुछ नहीं था, जिस कारण उसके पिता की भूख से मौत हो गई। उसने बताया कि अभी तक उनका राशन कार्ड भी नहीं बन पाया है।
घटना की खबर मिलते ही सर्कल अफसर लल्लन कुमार और प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोज कुमार गुप्ता मल्हार के घर पहुंचे। उन्होंने मल्हार के परिवार को 15 किलो चावल और 5000 रुपये का चेक दिया। कुमार ने कहा कि मल्हार की मौत का कारण भूख नहीं थी।
वहीं मल्हार की पड़ोसन करिश्मा देवी ने बताया कि उनकी मौत भूख के कारण ही हुई है। उसने बताया कि सरकार ने कई लोगों को राशन कार्ड जारी कर दिए हैं लेकिन उन्हें भी अनाज नहीं मिल पाया। घटना पर कार्रवाई करते हुए खाद्य, जनवितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय ने शुक्रवार को बैठक की। बैठक के ही एक सदस्य अशरफी नंद प्रसाद ने बताया कि पैनल ने अपनी रिपोर्ट फाइनल कर ली है, जो बुधवार को सरकार को सौंप दी जाएगी। उन्होंने बताया कि मौत के पीछे के कारणों की जांच के लिए जांच टीम भेजी जाएगी।