झारखंड में 52 फीसदी लड़कियों की शादी 18 वर्ष से कम में हो रही है और यह खुलासा हुआ है वर्ष 2010-11 के आंकड़े से।
राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण मिशन व राष्ट्रीय महिला कोष की कार्यकारी निदेशक रश्मि सिंह ने कहा कि जो कानून बने हैं, वे निष्प्रभावी हैं। वे बाल विवाह की रोकथाम के लिए आयोजित परामर्श कार्यशाला में हिस्सा लेने देवघर आईं थीं।
उन्होंने कहा कि अशिक्षा, गरीबी, बेकारी के कारण लोग इस दिशा में सोच नहीं पा रहे हैं। कड़े कानून बने हैं, लेकिन इसका लाभ लोग नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि लोगों में जागरूकता की कमी है।
ग्रामसभा के माध्यम से हो प्रचार-प्रसार
कार्यकारी निदेशक ने कहा कि अब सोचने का वक्त आ गया है कि आखिर कानून क्यों प्रभावी नहीं हो पा रहा है। इसके मूल्यांकन की रणनीति बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आज पंचायतीराज है ग्राम व वार्ड स्तर पर प्रतिनिधि हैं, लेकिन आज की तारीख में हम इन बॉडी का जागरूकता जैसे काम में इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। जरूरी है कि ग्रामसभा का अधिक से अधिक इस्तेमाल होय़ जो महिला संगठन, सेल्फ हेल्प ग्रुप बने हैं, वे ग्राम सभा का इस्तेमाल करके इस तरह की सामाजिक कुरीति के खिलाफ खड़े हों।