जम्मू विश्वविद्यालय में दो दिवसीय यूथ कॉन्क्लेव का समापन हो गया है। दिन भर विश्वविद्यालय के जनरल जोरावर सिंह सभागार में कार्यक्रम जारी रहा। देशभर से आए वक्ताओं ने युवाओं को विभिन्न विषयों पर व्याख्यान से जागरुक किया। इसमें इंडोनेशिया,दक्षिण अफ्रीका, रूस और कोरिया जैसे जी 20 देशों और नाइजीरिया, ईरान, मेडागास्कर, अफगानिस्तान आदि देशों के 17 युवा प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के वीसी प्रोफेसर उमेश राय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर हमेशा ज्ञान का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल के नेतृत्व में युवाओं को सशक्त बनाने के लिए मिशन यूथ जैसी कई योजनाएं शुरू की गई हैं। वाई 20 के संयोजक अजय कश्यप ने कहा कि जी 20 यह न सिर्फ देश के लिए सम्मान की बात है बल्कि एक जरूरी जिम्मेदारी भी है।
पिछले एक दशक से युवाओं को राष्ट्र के विकास की यात्रा में समान हितधारकों के रूप में कैसे माना जाता है। अश्विन सांघी ने कहा कि भारत की विरासत की समृद्धि और आज के युग में इसकी प्रासंगिकता को साझा किया। उन्होंने कहा कि असंगति की निरंतर स्थिति के लिए समाधान खोजने के लिए हमें अपनी जड़ों की ओर वापस जाना होगा।अपने अतीत में लौटकर देखना होगा कि कैसे जम्मू की भूमि में शांति का संचार हुआ।
पैनल चर्चाओं में लिया प्रतिभागियों ने भाग
पहला सत्र संघर्ष विराम और शांति निर्माण विषय पर आयोजित किया गया था। इस सत्र की अध्यक्षता विवि के प्रो. दीपांकर सैन गुप्ता ने की। लेखक और सामाजि कार्यकर्ता मनू खजूरिया सिंह ने कहा कि भारत की बढ़ती शक्ति और बिना किसी विस्तारवादी विचारधारा के भारत के धार्मिक सभ्यतागत इतिहास की विश्व स्तर की स्वीकृति है।
लेखक और वैज्ञानिक डॉ. आनंद रघुनंदन पूछा कि क्या दो लोगों के बीच समानता के बिना शांति हो सकती है? एडीजीपी पुलिस सिन्हा ने कहा कि हम धार्मिक सभ्यता के लिए अपने गैर विस्तारवाद के लिए और सदियों से शांतिवादी सभ्यता के लिए जाने जाते हैं। कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ हुआ।