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Jammu News: युवक की मौत पर जीएमसी में हंगामा

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जीएमसी में गुरमीत सिंह की मौत पर रोती बिलखती मां कुलदीप कौर और तीमारदार।
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-घरवालों का आरोप, इलाज में कोताही बरती गई, तभी उसने दम तोड़ा
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-डाॅक्टरों ने अभद्र व्यवहार पर भाई के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी में मंगलवार की सुबह 26 वर्षीय गुरमीत सिंह की मौत पर घरवालों ने हंगामा किया। उनका आरोप था कि उनके मरीज के इलाज में कोताही बरती गई। उसे घर से पेट में गैस की शिकायत होने पर लाया था, लेकिन डाॅक्टरों की लापरवाही से उसकी जान चली गई। इस मामले में डाॅक्टरों की ओर से मृतक के भाई द्वारा अभद्र व्यवहार करने के आरोप में उसके खिलाफ स्थानीय पुलिस में शिकायत दी गई है।
मृतक के भाई गुरदीप सिंह ने आरोप लगाया कि गुरमीत को मंगलवार की सुबह 10:30 बजे जीएमसी की इमरजेंसी में लाया गया। वह आटो चलाता था और मंगलवार तड़के भी उसने सवारी उठाई थी। लेकिन घर आने पर उसने पेट में गैस होने की शिकायत की। उनका आरोप है कि गुरमीत को चिकित्सा स्टाफ ड्रिप लगाकर छोड़ गया और उसकी डाॅक्टरों ने हालत नहीं देखी। इस बीच उसे दो और इंजेक्शन लगाए गए, जिसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। उनका आरोप है कि उनके भाई की मौत हुई है और उल्टा डाॅक्टरों ने उसके खिलाफ शिकायत कर दी है। मृतक की उपचार वाली फाइल भी स्टाफ जबरदस्ती छीनकर ले गया और कहते हैं कि 15 दिन बाद देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी के घर का सदस्य अस्पताल की इमरजेंसी में मर रहा है तो उन्हें उसके बारे में पूछने का क्या अधिकार नहीं है। मृतक की मां कुलदीप कौर का भी रो-रो कर बुरा हाल था। उन्होंने आरोप लगाए कि गुरमीत को पहले आक्सीजन लगाई गई थी, लेकिन उसे अचानक निकाल दिया गया, जिसके बाद उसकी हालत अधिक खराब हुई। कुलदीप कौर ने कहा, डाॅक्टरों की लापरवाही से मेरा कुंवारा बेटा इस दुनिया से चला गया। जीएमसी में डाॅक्टरों की मनमानी चल रही है और उन्हें पूछने वाला कोई नहीं है। इस बीच अस्पताल प्रशासन की ओर से शव को परिवार वालों को सौंप दिया गया है। बुधवार को गुरमीत का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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युवक को पहले से गंभीर हालत में लाए थे : प्रिंसिपल
जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डाॅ. आशुतोष गुप्ता ने सफाई देते हुए कहा कि युवक क्रोनिक लीवर बीमारी से पीड़ित था। उसे गंभीर हालत में जीएमसी लाया गया था। डाॅक्टरों की कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। मृतक को पहले भी कई बार उपचार दिया जा चुका है। मरीज को उपचार देने में कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
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