कारगिल युद्ध के दौरान सेना ने किया था किसानों की भूमि पर कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यौड़ियां। खौड़ के सीमावर्ती पलांवाला क्षेत्र के सीमांत चार गांवों के किसानों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को पत्र लिखकर सेना के कब्जे वाली उपजाऊ जमीन को वापस देने की मांग की है। इसमें गांव पलातन, छन्नी दिवानू, पलांवाला और पंजतूत के लोग शामिल हैं।
किसान व सेवानिवृत्त सूबेदार गुलबदन सिंह भाऊ ने बताया कि छंब विधानसभा क्षेत्र के सीमांत गांवों से लगभग 3200 कनाल उपजाऊ भूमि कारगिल युद्ध के दौरान सेना ने अपना डिफेंस मजबूत करने के लिए ली थी। वह भूमि आज भी सेना के पास है। किसानों को उसका न कोई मुआवजा मिला, और न ही भूमि वापस दी गई। किसान अशोक सिंह ने बताया कि उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि जितने समय तक जमीन सेना के पास रहेगी, उतने समय तक किसानों को मुआवजा मिलेगा। बाद में जमीन किसानों को दे दी जाएगी। लेकिन, ऐसा कभी हुआ नहीं।
किसान गोपाल सिंह ने बताया कि जमीन वापस देने की मांग को लेकर पलांवाला क्षेत्र के किसान टीसीपी चौक पर अनशन भी कर चुके हैं। तब आश्वासन दिया था कि कुछ ही दिनों में कोई फैसला लिया जाएगा। वर्ष 2018 में तत्कालीन गृहमंत्री से भी मुलाकात कर मुद्दा बताया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि उस भूमि पर सेना ने बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं। भूमि को माइन मुक्त कर किसानों को सौंपा जाएगा। किसानों ने बताया कि जिस जमीन से लोग सैकड़ों क्विंटल फसल उगाते थे, आज दाने-दाने को तरस रहे हैं। क्षेत्र के अधिकतर किसानों के पास अब एक मरला जमीन भी नहीं है। किसान होते हुए भी चावल, दाल, गेंहू खरीद कर खाना पड़ रहा है।