जम्मू। अगर आपको बाजार से दूध, दही, पनीर सहित मिर्च मसालों में मिलावट पर संदेह है तो आप केंद्रीकृत नंबर 104 पर फोन करके शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। यहां सभी खाद्य संबंधी शिकायतों का समाधान किया जाएगा। यही नहीं अगर आप चाहते हैं कि आपके क्षेत्र में मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच हो तो आप खाद्य सुरक्षा विभाग की मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन की सेवाएं ले सकते हैं। ये वैन मौके पर पदार्थों की गुणवत्ता के नतीजों को दिखाकर दोषी लोगों पर कानूनी कार्रवाई करेगी।
जम्मू और कश्मीर संभाग में पहले से तीन-तीन मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन की सेवाएं ली जा रही हैं। इन वैन में एक खाद्य समीक्षक, चालक, खाद्य सुरक्षा अधिकारी मौजूद रहता है। लोगों को जागरूक करने के लिए वैन पर एक स्क्रीन लगाई गई है, जिसके माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है। साथ ही जांच प्रक्रिया को भी दर्शाया जाता है। यह वैन कंप्यूटरीकृत होती है। हालांकि वैन की सेवाएं पहले से ली जा रही हैं, लेकिन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच के लिए लोगों को और जागरूक होने की जरूरत है। अमूमन लोगों को यह जानकारी ही नहीं होती है कि खासतौर पर बाजार से खरीदे जा रहे दुग्ध पदार्थों की गुणवत्ता कितनी है।
दूध में देखे जाते हैं फैट और सालेज नान फैट कंटेंट
दूध में गाय, भैंस, मिक्सड और पैकेड दूध में फैट कंटेंट और सालेड नान फैट कंटेंट देखे जाते हैं। नए मानकों के तहत गाय के दूध में 3.2 प्रतिशत, भैंस के दूध में 5 प्रतिशत और मिक्सड दूध में 4.5 फैट कंटेंट होने चाहिए। इससे अधिक फैट कंटेंट होने पर दूध की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
भारत सरकार की ओर से एक माह में जम्मू और कश्मीर संभाग के लिए तीन-तीन नई मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे दोनों जिलों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता प्रक्रिया में बढ़ोतरी होगी। लोग निर्धारित टोल फ्री नंबर पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संबंधी शिकायत दे सकते हैं।
- मदन लाल मगोत्रा, उपायुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग