सांबा में पानी की किल्लत बनी हुई है। सर्दी के दिनों में भी चार से पांच दिनों बाद जलापूर्ति हो रही है। ऐसे में गर्मी के मौसम में पानी का संकट बने रहने की आशंका बनी हुई है। लोगों का कहना है कि संसाधन होने के बावजूद विभाग हर रोज पानी देने में नाकाम रहा है। कहीं हौज लीक हैं, पाइप टूटे हैं जिनसे व्यर्थ पानी बह रहा है। ऐसे में हर रोज पानी की आपूर्ति कर पाना विभाग के लिए भी मुश्किल है।
कस्बे के बसंतर दरिया के उत्तरी किनारे पर विभाग की ओर से फिल्टरेशन प्लांट की इमारत चार वर्षों से बन कर तैयार है। लेकिन, इसमें अब तक मशीनरी नहीं लगी। इस्तेमाल न होने और रखरखाव के अभाव में इमारत भी खंडहर बनती जा रही है। सांबा कस्बे के लिए विभाग को 12 लाख गैलन हर रोज पानी की जरूरत है। लेकिन, यहां केवल तीन से चार लाख गैलन पानी की आपूर्ति ही हो रही है। पानी जमा करने के लिए बनाए हौज भी लीक हैं। जिस हौज को सात घंटे में भरना है, वहां 12 से 13 घंटे लग जाते हैं। किसी ट्यूबवेल की मोटर जल जाती है तो एक सप्ताह के बाद मोटर मिलती है। विभाग के पास स्टैंड बाई मोटर की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में लोग गर्मी में भी हर रोज पानी के लिए परेशान रहेंगे।
जिला विकास फंड से रुपये देने पर बनी सहमति
गर्मी में पानी की किल्लत को कम करने के लिए नगर परिषद के पार्षदों ने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर पानी की किल्लत को खत्म करने पर चर्चा की है। इसमें सभी 17 पार्षदों ने सहमति बनाई कि जिला विकास फंड से कुछ रुपये जल शक्ति विभाग को दिए जाएंगे, जिससे ट्यूबवेल पर स्टैंड बाई मोटर रखी जा सके।
पुराने लीक हौज की मरम्मत करने के लिए भी फंड दिया जांएगा। वहीं, मंडी थलोरा, त्रिलोका छपडी, किले के पास ओवर हैड टैंक बनाए जाने की भी मांग की है। जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से कहा गया है कि पीएचई को बिजली की विशेष लाइन के साथ जोड़ा जाए। विभाग के पास ट्रांसफार्मर की मरम्मत के लिए अपनी वर्कशॉप होनी चाहिए।
जल शक्ति विभाग के पास पानी के संसाधन हैं। इसके बावजूद लोगों को पानी नहीं मिल रहा। हर जिले में विभाग के सिविल और मैकेनिकल दो कार्यकारी अभियंता होते हैं। लेकिन, सांबा में ऐसा नहीं है। यहां केवल सिविल का ही कार्यकारी अभियंता है। फंड की कमी कारण भी पानी की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।
- विकेश अंबा, सामाजिक कार्यकर्ता, सांबा।
कस्बे के कंई वार्डों में पाइप डाले गए हैं। लेकिन, उन्हें मुख्य लाइन से नहीं जोड़ा गया है। कंई पाइप लीक हैं, जिससे गंदे पानी की आपूर्ति होती है। फिल्टरेशन प्लांट पर मशीनरी लगाई जाए, ताकि गर्मियों में पानी की किल्लत से बचा जा सके।
-अमरदीप सिंह, जिला प्रधान, सिविल सोसायटी, सांबा।
पानी जमा करने के लिए मंडियों में हौज बनाए गए हैं, जो लीक होते हैं। विभाग को कंई बार लीकेज ठीक करने को कहा गया है, लेकिन कोई उचित कदम नहीं उठाया जाता। ऐसे में हर बार गर्मियों में पानी की आपूर्ति प्रभावित रहने से लोग परेशान होते हैं।
- राज सिंह, पार्षद, नगर परिषद, सांबा।
मार्ग पर डाले गए पाइप लीक होते हैं तो उनकी समय-समय पर मरम्म्त की जाती है। फिल्टरेशन प्लांट के लिए इनटेक सिस्टम लगाकर पंप व मशीनरी लगाने के लिए छह करोड़ रुपये की जरूरत है। गत वर्ष 70 लाख रुपये मिले थे, जिनसे मनोहर गोपाला में एक ट्यूबवेल को पंप सेट के साथ जोड़ा गया। उसका पानी भी कस्बे को दिया जाता है। सरकार जैसे ही फंड देगी, फिल्टरेशन प्लांट का काम शुरू किया जाएगा। गर्मी में लोगों को पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी।
- भारत विकास, एईई, जल शक्ति विभाग, सांबा।