अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। खोदा पहाड़, निकली चुहिया...यह मुहावरा सरकारी कार्यप्रणाली पर उस समय चरितार्थ हो गया जब तीन साल पहले जलशक्ति विभाग ने पानी की किल्लत और रिसाव की समस्या का हल निकालने के लिए खोदाई की। उस दौरान लोहे के बजाय कई जगहों पर प्लास्टिक के पाइप मिले, वे भी क्षतिग्रस्त थे और पानी सड़कों पर बह रहा था। कई जगहों पर तो पाइप ही नहीं दिखे। मगर अफसोस, अधिकारियों की ओर से लगभग चार करोड़ रुपये का घपला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं की गई।
दरअसल, बाहु प्लाजा, नरवाल, बठिंडी, छन्नी सहित अन्य इलाकों में पेयजल समस्या के निदान के लिए 2011 में 10 करोड़ मंजूर हुए। ईरा (इकोनॉमिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी) के माध्यम से 22 किलोमीटर तक लोहे के नए पाइप बिछाने का काम करवाया गया, जो 2013 में पूरा हुआ। एजेंसी की तरफ से पाइप को विभाग के पाइप के साथ जोड़ना था, लेकिन संबंधित विभाग के कुछ अधिकारियों की अनदेखी की वजह से ठेकेदार काम में हेरफेर कर चलता बना। जैसे ही जलशक्ति विभाग ने पाइप लिंक करने की कोशिश की तो क्षतिग्रस्त होने के कारण जुड़ नहीं पाए। बाद में पाइप बदलने के लिए ईरा को लिखा गया, पर कुछ नहीं हुआ।
2019-20 में नरवाल, सैनिक कॉलोनी, ग्रेटर कैलाश, पनामा चौक, न्यू प्लाट, रिहाड़ी समेत अन्य जगहों पर विभाग की ओर से पाइप जोड़ने का काम शुरू किया गया। उस दौरान कुछ जगहों पर पाइप ही नहीं मिले। जहां पाइप का कनेक्शन किया गया, वहां ब्लॉकेज की समस्या सामने आई। इसके बाद खोदाई की तो प्लास्टिक के पाइप दिखे। यही नहीं, ये पाइप भी क्षतिग्रस्त थे। ऐसे में सप्लाई छोड़ने पर पानी सड़कों पर बहने लगा। ऐसा सिर्फ एक नहीं, कई इलाकों में हुआ। सूत्रों के अनुसार 40 फीसदी प्लास्टिक के पाइप मिले थे, जिस पर कम खर्च होने के बाद भी 10 करोड़ दिखाए गए। इससे करीब चार करोड़ का नुकसान हुआ। इसके बावजूद अफसर शांत रहे और लोग अब पानी के लिए परेशान हैं।
...इसलिए भी टैंकरों पर लोग आश्रित
आमजन को लाभ नहीं मिलने के कारण परियोजना सवालों के घेरे में आ गई। हर बार गर्मी में लोगों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा है। यहां तक कि लोगों को निजी टैंकर मंगवा कर प्यास बुझानी पड़ रही है। अब तक परियोजना पर दोबारा से काम नहीं हुआ। जलशक्ति विभाग के अनुसार ईरा को अवगत करवाया गया था। वहीं, ईरा के अधिकारियों का तर्क है कि प्रोजेक्ट जलशक्ति विभाग को हैंडओवर किया गया है। आगे काम विभाग ने करना है।
काम सही तरीके से नहीं हो रहा
वार्ड-74 के पार्षद शौबत अली ने कहा कि परियोजना पर काम सही तरीके से नहीं करवाया गया। इस कारण लोग दिक्कत झेल रहे हैं। मौजूदा समय में भी जलशक्ति विभाग एस्टीमेट ही बना रहा है। वहीं, नेता विपक्ष द्वारका चौधरी ने कहा कि जहां पर काम हुआ, वहां राशि का दुरुपयोग ही हुआ। काम होने के बाद भी शहरवासियों को लाभ नहीं मिल रहा। वार्ड-73 के पार्षद प्रो. युद्धवीर के अनुसार काम में ही लीकेज हो रही है। परियोजना की गुणवत्ता को देखने के लिए किसी अधिकारी के पास समय तक नहीं है।
जरूरत हुई तो जांच करवाई जाएगी। फिलहाल तमाम परियोजना जलशक्ति विभाग को हैंडओवर की गई है। जहां समस्या होगी, वहां निदान किया जाएगा।
- जावेद बुखारी, निदेशक, इकोनॉमिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी
इलाकों को अब जल जीवन मिशन के तहत नई परियोजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। पहले की परियोजनाओं पर परेशानी आई थी। अब तमाम जगहों के लिए प्लान बने हैं।
- अनिल गुप्ता, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग जोन-दो