जम्मू-कश्मीर के छात्र अब स्नातक से लेकर परास्नातक तक की पढ़ाई मातृ भाषा डोगरी में भी कर सकेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पाठ्यक्रमों का डोगरी में अनुवाद कराने का फैसला लिया है।
दूसरी वर्कशॉप 18 से हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में होगी। इसके बाद पुस्तकों के अनुवाद का काम शुरू होगा। यह अहम जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, कांगड़ा को सौंपी गई है।
हिमाचल विश्वविद्यालय में पंजाबी डोगरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. नरेंद्र कुमार ने बताया। यूजीसी भारतीय भाषा समिति ने कॉमर्स, साइंस, आर्ट्स 50 से ज्यादा किताबों के अनुवाद से संबंधित प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी दी है।
अनुवादकों को जोड़ने का काम शुरू कर दिया है। प्रोजेक्ट का सबसे ज्यादा लाभ जम्मू-कश्मीर के युवाओं को होगा। उन्हें मातृ भाषा में पाठ्यक्रमों की पढ़ाई का मौका मिल सकेगा। महिला कॉलेज कठुआ के सहायक प्रो. रितु राज शर्मा बताते हैं कि स्नातक व परास्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों का डोगरी में अनुवाद किया जाएगा। छात्र डोगरी में संबंधित विषय पढ़ सकेंगे। मौलाना आजाद मेमोरियल कॉलेज की सहायक प्रोफेसर दीपिका मेहरा बताती हैं कि केंद्रीय विश्वविद्यालय ने आर्ट्स संकाय की पुस्तकों का डोगरी में अनुवाद करने का काम उन्हें सौंपा है।
इस तरह मिल रहा काम
हर पुस्तक के अनुवाद के लिए दो डोगरी शिक्षाविद जोड़े जा रहे हैं। एक विषय विशेषज्ञ होगा, दूसरा डोगरी का जानकार। डोगरी का जानकार विषय विशेषज्ञ के अनुसार अनुवाद करेगा।
डोगरी में पुस्तकें लिखने के लिए जम्मू संभाग के शिक्षाविदों को काम सौंपा जा रहा है। अभी 50 पुस्तकों का डोगरी में अनुवाद करवाया जाएगा। अनुवाद का यह सिलसिला जारी रहेगा।
-डॉ. नरेंद्र कुमार, एचओडी, पंजाबी-डोगरी विभाग सीयू कांगड़ा
अनुवाद की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर के शिक्षाविदों को
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय ने किताबों के डोगरी में अनुवाद के लिए प्रोफेसरों व लेक्चररों से आवेदन मांगे थे। जम्मू-कश्मीर के शिक्षाविदों ने इसमें रुचि दिखाई। 10 आवेदनों पर विश्वविद्यालय ने हरी झंडी दे दी है। इन्हें 15 किताबों के अनुवाद की जिम्मेदारी दी गई है।
इन्हें भी मिली जिम्मेदारी
प्रो. सुषमा शर्मा, जम्मू विवि
डॉ. शोभा रानी, गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज चिनैनी
डॉ. रूपाली शर्मा, गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज उधमपुर
सेकेंडरी स्कूल
डॉ. नरेंद्र कुमार, गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, बनी
यशपाल निर्मल, सहायक संपादक डोगरी भाषा सेल
राजेंद्र, डोगरी के जानकार
डॉ. सुषमा राजपूत, गरोटा हायर
नरेश कुमार रैना, लेखक