महिलाओं ने व्रत रख घरों और मंदिरों में की तुलसी पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
परगवाल। सीमा क्षेत्र में वीरवार को तुलसी विवाह पर्व की धूम रही। तुलसी विवाह के अवसर पर विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं ने तुलसी की पूजा की। महिलाओं ने व्रत रखा और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा की।
सुबह से ही महिलाएं तुलसी पूजा की तैयारियों में जुटी थीं। शाम को तुलसी को रंगों से सजाने के साथ लाल चुुनरी, कलीरा, गन्ना व ज्योत जला कर सुख-शांति की कामना की। महिलाओं ने तुलसी पर शृंगार सामग्री भी चढ़ाई। मंदिरों व घरों में तुलसी को दुल्हन की तरह सजाया गया था। शाम को तुलसी आरती व पूजन किया गया। महिलाओं ने निराहार रह कर तुलसी का व्रत रखा। पंडित शुभम शर्मा ने बताया कि आज के दिन भगवान विष्णु रूपी शालिग्राम का विवाह तुलसी माता के साथ करवाया जाता है। मान्यता है कि भगवान ने देवताओं की जीत के लिए राक्षस कुल की एक पतिव्रता स्त्री और उनकी भक्त वृंदा की पूजा को भंग किया था। इससे वृंदा के पति जालंधर का विनाश हो सका। तब नाराज वृंदा ने भगवान विष्णु को शिला बनने का श्राप देकर खुद आत्मदाह कर लिया था। वृंदा की राख से तुलसी पैदा हुई, और भगवान ने श्राप से मुक्त होने के लिए तुलसी से विवाह किया। तभी से देव उठनी एकादशी व्रत प्रारंभ हुआ और घरों व मंदिरों में तुलसी विवाह का आयोजन किया जाने लगा।