परिजन बोले- नशा छुड़ाने के लिए कई सेंटरों में भेजा
एक-दो महीने शांत रहने के बाद फिर शुरू कर देते थे नशा
संवाद न्यूज एजेंसी
मीरा साहिब
नशे की ओवरडोज से एक माह के भीतर तीन युवाओं की मौत हो चुकी है। पुलिस ने तीनों मामलों में धारा 174 के तहत मामले दर्ज किए हैं। नशा करने वाले लोगो के परिजनों ने बताया कि वह उन्होंने अपने युवा बच्चों का नशा छुड़ाने के लिए कई नशामुक्ति केंद्रों में भेजा। मगर वापस आने पर एक-दो माह के बाद नशा करना शुरू कर देते थे।
केस-1
गांव गंडे का अशोक कुमार (20) पुत्र दर्शन लाल दो बहनों का इकलौता भाई था। घर से दोस्तों के साथ गया था मगर वापस नहीं लौटा। परिजनों ने दोस्तों से अशोक कुमार के बारे में पूछने पर कहा कि वह उनके साथ गया था मगर बाद में न जाने कहां चला गया। परिजनाें ने तीन चार दिन तक तलाश की। मगर कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में गांव सिकंदर पुर क्षेत्र में पुलिस ने युवक का शव बरामद किया था। परिजनों का कहना है कि तीन साल से नशा कर रहा था। बाद में छोड़ भी दिया मगर फिर से शुरू कर दिया था।
केस -2
गांव सिंह पुरा के जसप्रीत (25) सिंह का शव गांव दरसोपुर में जैकफैड के बंद कारखाने में झाडियों में मिला था। वहां लोगों के देखने पर मीरां साहिब पुलिस थाने में सूचना दी थी। पुलिस को शव वाली जगह से इंजेक्शन, सीरिंज भी मिली थी। जसप्रीत शादीशुदा था और पत्नी विदेश में है। मगर नशे की लत में उसकी जान चली गई।
केस 3-
गोेबिंदपुरा सिंबल से 200 मीटर दूर हैड पुल के पास पुलिस को झाड़ियों में युवक का शव मिला था। इसकी पहचान विशाल भगत (20) के रूप में हुई थी। बताया जा रहा है कि वह एक साल से नशा कर रहा था। वह मेडिकल नशा करता था। नशे की ओवरडोज के कारण जब मौत हुई तो उसकी नाक से सफेद रंग का केमिकल निकल रहा था। मृतक के पिता के मुताबिक उसका बेटा अक्सर कहता था कि उसका दिल घबराता है। हालात यह हो गई थी कि वह नशे के बिना नहीं रह पाता था।
हेरोइन के नशे पर नियंत्रण करना जरूरी है। इस पर पुलिस भी कड़ी कार्रवाई कर रही है। जब तक सरकार कड़ा कानून नहीं बनाती इस पर नियंत्रण करना काफी मुश्किल है। नशे के कारण कई घरों के चिराग बुझ रहे हैं, मगर सरकार इस पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है।
पूर्व सरपंच किशोर कुमार, मरालिया पंचायत
पुलिस नशे की रोकथाम के लिए उपजिला में बने हॉटस्पाॅट स्थानो पर दबिश दे रही है। मगर लोग खुलकर सामने नहीं आने पर दिक्कत आ रही है। पुलिस मृतकों के पोस्टमार्टम व एफएसएल की रिपोर्ट आने पर कानून के तहत कार्य करती है, मगर बच्चों के परिजन खुलकर सामने नहीं आते। अगर किसी का बच्चा नशा करता है और वह किसके पास जाता है। इसके बारे में समय रहते पुलिस के नोटिस में लाने पर कार्रवाई करने के साथ नशा करने वाले युवक नशामुक्ति केंद्र में भेजा जाता हैं। लोगों को पुलिस का सहयोग करना चाहिए।
निखिल गोगना, एसडीपीओ आरएस पुरा