पौनी में कथा सुनने पहुंचीं महिलाएं। स्रोत : संवाद
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पौनी। काली धार में स्थित समाधि मंदिर में कथा का आयोजन किया गया। इस दौरान कथावाचक नारायण भारती ने भोजवंशी राजा सत्राजित की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि वृत्तांत महर्षियों की इच्छा से विस्तार से बहुत पहले द्वारका पुरी में भोजवंशी राजा सत्राजित रहता था। सूर्य की भक्ति व आराधना के बल पर उसने स्वमंतक नाम की अत्यंत चमकदार मणि प्राप्त की। मणि की कांति से राजा स्वयं सूर्य जैसा प्रभा मंडित हो जाता था। इस भ्रम में जब यादवों ने श्रीकृष्ण से भगवान सूर्य के आगमन की बात कही तब अंतर्यामी कृष्ण ने यादवों की शंका का निवारण करते हुए कहा कि आने वाले महानुभाव स्वमंतक मणिधारी राजा सत्राजित हैं, सूर्य नहीं। संवाद