डुडू बसंतगढ़, लोहाई मल्हार, ढग्गर, नुकनाली और सियोजधार के इलाकों में ले रहे शरण
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। डुडू बसंतगढ़, फिर छत्रगला और अब बदनोता में आतंकियों की ओर से किए गए हमले साफ कर रहे हैं कि तीन जिलों की सरहद का वे पूरी तरह से फायदा उठा रहे हैं।
डुडू बसंतगढ़ से कमलोह गलां, ढग्गर और नुकनाली धार से लेकर कैलाश कुंड से होते हुए छत्रगला का इलाका आतंकियों के लिए एक पुराना रूट रहा है। लोहाई मल्हार और बदनोता में नब्बे के दशक में अशांति के समय भी आतंकी इस इलाके से आसानी से डुडू बसंतगढ़ या फिर बनी सब डिवीजन का रुख करते रहे हैं। सुरक्षाबलों के लिए चुनौती इसलिए भी है चूंकि ये इलाके सड़क संपर्क से जुड़े नहीं हैं। इन इलाकों की चोटियों पर मौसमी ढोंक और नदी नालों के साथ प्राकृतिक गुफाएं आतंकियों के लिए पनाहगार बनती हैं।
लोहाई मल्हार के इलाके में इस हमले के बाद इन आतंकियों के कमलोह गला से डुडू बसंतगढ़, फिर ढग्गर, नुकनाली, कैलाश कुंड से होते हुए सियोज धार की ओर निकलने के लिए कई रूट हैं। इनके कई दिनों तक इसी इलाके में छिपे रहने के भी लिए कई लोकेशन हैं। घने जंगलों के साथ नाले इन इलाकों को एक दूसरे से जोड़ते हैं। ऐसे में सुरक्षाबलों के लिए भी अहम है कि वे तीनों जिलों से संयुक्त रूप से एक बड़ा अभियान चलाकर आतंकियों का खात्मा करें।
सुरक्षा एजेंसियों को यह भी अंदेशा है कि छह से सात आतंकियों के इस दल ने डुडू बसंतगढ़ में सुरक्षा बढ़ने के बाद नुकनाली, लोहाई मल्हार के पहाड़ियों और फिर छत्रगलां की पहाड़ियों में कई महीने बिताए। हाल फिलहाल में एजेंसियों को लगातार कुछ संदिग्धों के बिलावर से सटे इलाकों में देखे जाने को लेकर भी इनपुट मिल रहे थे। कोटी गांव में दो सप्ताह पहले एक महिला ने नाले के नजदीक कुछ संग्दिधों को देखने की जानकारी दी थी। उन्होंने उससे खाना मांगा और फिर किसी को न बताने की बात कही थी। बिलावर पुलिस की ओर से बिलावर और आसपास के इलाकों को भी हाल फिलहाल में खंगाला गया था। बदनोता के स्थानीय लोगो के अनुसार उधमपुर के डुडू बसंतगढ़ की ओर जाने के लिए बदनोता से लगभग एक घंटे का पैदल सफर कडवा तक करना पड़ता है। इसके बाद आसानी से डुडू बसंतगढ़ की ओर जाने में ज्यादा समय नहीं लगता है। उधर, डगरी टॉप से ढग्गर की ओर जाने में भी आम लोगों को डेढ़ से दो घंटे का ही समय लगता है।