प्रत्यक्षदर्शी बोला - पहले समझा गाड़ी का टायर फटा, फिर दोनों ओर से शुरू हुई भारी गोलाबारी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बिलावर के बदनोता इलाके में सोमवार दोपहर आतंकी लगभग डेढ़ घंटे तक सेना के वाहनों पर गोलीबारी करते रहे। लगभग तीन बजकर 20 मिनट पर आतंकियों ने सेना के काफिले को निशाना बनाया।
इससे पहले तीन बजे के आसपास एक यात्री बस इसी रूट से गुजरी थी। इसके 15 मिनट बाद सेना के दो वाहन गुजरे और एक धमाका हुआ। पहले तो लगा कि वाहन का टायर फटा है, लेकिन इसके बाद ताबड़तोड़ गोलियों की आवास सुनी तो दुकान के भीतर ही दुबक गए। ये बातें आतंकी हमले से मात्र कुछ दूरी पर स्थित एक दुकान के मालिक ने बताईं।
दुकानदार पूर्णचंद शर्मा ने बताया कि सोमवार दोपहर को वह दुकान पर ही थे। तीन बजे के लगभग यात्री बस सामने से गुजरी। इसके 15 मिनट बाद सेना के दो वाहन निकले। तुरंत बाद अचानक धमाके की आवाज सुनाई दी। इसके बाद गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका गूंज उठा। दोनों ओर से गोलाबारी का सिलसिला लगभग शाम पांच बजे तक चलता रहा। इसके बाद छह बजे तक एक ही ओर से गोलियों की आवाज सुनाई देती रही। उन्होंने बताया कि गोलीबारी की आवाज सुनकर वह भी दुकान के भीतर ही कांप रहे थे। पूर्ण चंद ने बताया कि गोलीबारी थमी तो उन्होंने और दुकान पर मौजूद कुछ अन्य लोगों ने सेना की मदद की। घायलों और मृतकों को गाड़ी से निकाला। उन्हें अस्पताल शिफ्ट करवाया गया।
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दुकान पर पति की जगह बैठी महिला, गोलीबारी के
बीच परिवार से भी नहीं हो पा रहा था संपर्क
.... खौफ के उन चार घंटों की आपबीती
कठुआ। सैन्य काफिले पर जिस जगह हमला हुआ, वहां से मात्र 100 मीटर की दूरी पर एक अन्य दुकान में पति की जगह महिला बैठी थी। उन्होंने आपबीती सुनाई। कहा कि आम तौर पर पति दुकान पर बैठते हैं, लेकिन उन्हें कहीं काम से जाना था। लिहाजा उनकी जगह वह खुद दुकान संभाल रही थीं। अचानक सवा तीन बजे के लगभग गोलियों की आवाज सुनाई दी। इसके बाद वह चार घंटे तक दुकान के भीतर ही दुबकी रही। इस बीच उन्होंने परिवार और पति से भी फोन के जरिए संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन पति का फोन भी नहीं लग पा रहा था। उधर, महिला के पति भी इतने ही परेशान नजर आए। उन्होंने कहा कि वे कभी इस मंजर को भूल नहीं पाएंगे। दुकान के पास ही आतंकी हमले की सूचना मिलने के बाद उन्होंने भी अपनी पत्नी से फोन पर संपर्क करने के कई प्रयास किए, लेकिन मोबाइल नहीं मिल पा रहा था। गोलीबारी थमने के बाद जब संपर्क हुआ तो परिवार की जान में जान आई। महिला ने बताया कि यह खौफनाक मंजर उन्हें जिंदगी भर याद रहेगा। संवाद