बुरहान वानी, जाकिर मूसा, रियाज नायकू, हमाद खान, समीर टाइगर आदि आतंक के वो नाम हैं, जिनके इशारों पर 100 से 150 आतंकी और दो हजार से अधिक आतंकी मददगार काम करते थे। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने इन आतंक के आकाओं को मौत के घाट उतार दिया है। अब आलम यह है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों के पास आतंकी गतिविधियों को चलाने की कमान देने वाला कोई आतंकी कमांडर नहीं है।
यहीं कारण है कि अब हाइब्रिड आतंकियों को तैयार किया जा रहा है। उनसे टारगेट किलिंग कराई जा रही है। इसलिए इन हाइब्रिड आतंकियों से पाकिस्तानी हैंडलर सीधे बात करते हैं। पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर किसी कमांडर या अन्य आतंकी को कमान सौंपने की जगह खुद ही आदेश दे रहे हैं और बता रहे हैं कि उनको किस तरह से आतंकी गतिविधियां चलानी हैं।
पिछले दो साल की बात करें तो रियासी में गिरफ्तार आतंकी, सुंजवां में आतंकी हमला, रामबन के डुडु पुलिस चौकी पर हमला, बस स्टैंड पर आईईडी के साथ गिरफ्तार आतंकी, कालूचक सैन्य कैंप के पास गिरफ्तार आतंकियों, जम्मू के खटीका तालाब में गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में एक ही बात सामान्य है कि इनको हमले और गतिविधियां चलाने के लिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर आदेश दे रहे थे। इन आतंकियों को प्रदेश में किसी आतंकी से आदेश नहीं मिल रहा था। इन आतंकियों को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसी साइटों से आदेश दे रहे थे कि इनको कहां पर हथियार मिलेंगे, किस तरह से आतंकी वारदातों को अंजाम देना है। डेढ़ साल से इन आतंकियों को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर जानकारी दे रहे थे।
पूर्व डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि एक सच यह भी है कि आतंकी कमांडर अब एक हद तक न के बराबर हैं। दूसरा यह है कि आतंकी संगठनों के पास सोशल साइटों के जरिए हाइब्रिड आतंकियों से वारदातों को अंजाम देना आसान है, इसलिए सीधे संपर्क कर रहे हैं।
आशिक नेंगरू है सबसे बड़ा हैंडलर
पुलवामा का रहने वाला आतंकी आशिक नेंगरू इस समय पाकिस्तान में है। 4 साल पहले जम्मू के झज्जर कोटली में आतंकी हमले के वक्त यह भी वहीं पर था, लेकिन किसी तरह से वहां से फरार हो गया और पाकिस्तान पहुंच गया। अब आशिक पाकिस्तान में बैठ कर पंजाब और जम्मू में ड्रोन के जरिए हथियार भेजता है। हाइब्रिड आतंकियों को तैयार करता है और उनसे आतंकी वारदातों को अंजाम देता है।