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Terror Network: दीनी तालीम के नाम पर नेपाल में आतंक की नर्सरी तैयार कर रहा है लश्कर, मदरसे में दिखे संदिग्ध

Sun, 31 May 2026 04:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक राज, श्रीनगर

सार

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान में प्रशिक्षित युवाओं को आतंकी संगठन दीनी तालीम के नाम पर नेपाल भेजकर नया नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। इनमें से कुछ नेपाल होते हुए दिल्ली व जम्मू कश्मीर में भी सक्रिय हो गए हैं।
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के कुछ युवा इस सप्ताह काठमांडू के एक मदरसे में देखे गए हैं, जहां उनकी मदद रहीम बाबा कर रहा है। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में सेना की सख्ती और बॉर्डर पर मजबूत सुरक्षा घेरे के बीच लश्कर-ए-तैयबा व हिजबुल जैसे आतंकी संगठनों ने घुसपैठ का रुख और रूप बदलना शुरू कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान में प्रशिक्षित युवाओं को आतंकी संगठन दीनी तालीम के नाम पर नेपाल भेजकर नया नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। इनमें से कुछ नेपाल होते हुए दिल्ली व जम्मू कश्मीर में भी सक्रिय हो गए हैं।

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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के कुछ युवा इस सप्ताह काठमांडू के एक मदरसे में देखे गए हैं, जहां उनकी मदद रहीम बाबा कर रहा है। रहीम का जुड़ाव जाली नोटों की तस्करी वाले गिरोह से रहा है। वह दाऊद के लिए भी काम कर चुका है।

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हत्या के बाद आईएसआई नेपाल के रास्ते घुसपैठ कराकर कुछ बड़ा करने की साजिश रच रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार लश्कर-ए-तैयबा इसके लिए युवाओं में जहर घोलकर नेपाल में आतंक की नर्सरी तैयार कर रहा है। आतंकी संगठन की ओर से इसी रास्ते यूपी चुनाव से पहले बड़े हमले की साजिश रचने की भी बात सामने आ चुकी है, जिसके बाद गिरफ्तारियां भी हुईं।
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रक्षा मामलों के जानकार विक्रम सिंह के अनुसार जम्मू-कश्मीर में ताबड़तोड़ कार्रवाई से कमर टूटने पर अब जैश व लश्कर नेपाल में संगठन को संभालने के लिए बैसाखी तलाश रहे हैं। इसमें दोनों की मदद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई कर रही है। हमजा बुरहान की हत्या के बाद आतंकी संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।

जम्मू निवासी सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह जमवाल कहते हैं कि भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाने की कोशिश कट्टरपंथी और आतंकी संगठन करते हैं। अब इस पूरे नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों, घुसपैठ और आतंकी नेटवर्क की निगरानी हो रही है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर और देश में अशांति फैलाने के लिए नए तरीके अपनाता है। केंद्र सरकार की मजबूत सुरक्षा नीतियों और सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई से उसके मंसूबे नाकाम हो रहे हैं।

आईएसआई की मदद से घुसपैठ के लिए नेपाल के प्रयोग की बात पहले भी सामने आ चुकी है। अक्तूबर 2025 में श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला में देश विरोधी गतिविधियों में पकड़े गए संदिग्धों ने भी नेपाल होते हुए देश में दाखिल होने की बात स्वीकारी थी। इसी के बाद उत्तर प्रदेश में भी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के बड़े स्लीपर मॉड्यूल का खुलासा हो सका। पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में भी सक्रिय नेटवर्क को तोड़ने में सफलता मिली।

यूं तो सीधे तौर पर नेपाल में अभी तक आतंकी हमला नहीं हुआ है। लेकिन जनवरी 2026 में चुनाव प्रचार के दौरान बीरगंज में हुए विरोध प्रदर्शन और आगजनी में सीधे तौर पर आईएसआई का नाम सामने आया था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इसे नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में कट्टरवाद के बढ़ावे के रूप में लिया। अभी बड़ी चुनौती खुली सीमा, नेपाल के रास्ते भारत पहुंच रही जाली नोटों की खेप, हथियारों की तस्करी, हवाला के माध्यम से टेरर फंडिंग और गलत तरीके से भारतीय पहचान पत्र के उपयोग को रोकना है।

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